Iran War Energy Crisis: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और ऊर्जा संकट का असर अब दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। खासकर एशियाई देशों में दफ्तरों, स्कूलों और आर्थिक गतिविधियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार संकट की जड़ है रणनीतिक समुद्री मार्ग Strait of Hormuz, जिसे लेकर तनाव बढ़ गया है। इस रास्ते से हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। लेकिन युद्ध के हालात के कारण तेल आपूर्ति में भारी बाधा आ गई है।
इस आपूर्ति संकट का असर खासकर उन देशों पर ज्यादा पड़ रहा है जो खाड़ी देशों के तेल पर काफी निर्भर हैं। परिणामस्वरूप कई सरकारों को स्कूल बंद करने, वर्क फ्रॉम होम लागू करने और ऊर्जा बचत के लिए विशेष कदम उठाने पड़े हैं।
एशियाई देशों में आपात कदम
तेल की कमी और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कई देशों ने अलग-अलग उपाय अपनाए हैं।
पाकिस्तान
Pakistan में हालात काफी गंभीर हो गए हैं। सरकार ने पूरे देश में दो हफ्ते के लिए स्कूल बंद करने का फैसला लिया है। वहीं पंजाब प्रांत में 31 मार्च 2026 तक छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं।
इसके अलावा सरकारी और निजी दफ्तरों में 4-डे वर्क वीक लागू किया गया है और लगभग 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने की अनुमति दी गई है।
फिलीपींस
Philippines में भी ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। यहां राष्ट्रपति ने सरकारी कर्मचारियों के लिए चार दिन का कार्य सप्ताह (4-Day Work Week) लागू करने का आदेश दिया है।
फिलीपींस अपनी तेल जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत खाड़ी देशों से आयात करता है, इसलिए सप्लाई में रुकावट से यहां की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
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थाईलैंड
Thailand में सरकारी कर्मचारियों को घर से काम (Work From Home) करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही ऊर्जा बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों में एयर कंडीशनर का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस पर तय कर दिया गया है ताकि बिजली की खपत कम हो सके।
वियतनाम
Vietnam में सरकार ने नागरिकों से कारपूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल करने की अपील की है।
कई कंपनियों को भी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके।
बांग्लादेश
Bangladesh में ऊर्जा संकट से निपटने के लिए तेल की राशनिंग शुरू कर दी गई है।
इसके अलावा कई विश्वविद्यालयों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है ताकि बिजली और परिवहन पर होने वाले खर्च को कम किया जा सके।
श्रीलंका
Sri Lanka में भी हालात तनावपूर्ण हैं। यहां सरकार ने पैनिक बाइंग रोकने के लिए ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज़ जलडमरूमध्य
ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा Strait of Hormuz से होकर गुजरता है।
यह संकरा समुद्री मार्ग खाड़ी देशों को वैश्विक बाजार से जोड़ता है। अगर यहां तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो उसका असर दुनिया भर की ऊर्जा कीमतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
युद्ध के कारण इस मार्ग पर सुरक्षा खतरे बढ़ गए हैं। इसी वजह से कई देश अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
एशिया के बड़े देश भी सतर्क
ऊर्जा संकट को देखते हुए Japan, South Korea और China जैसे बड़े देश अपने इमरजेंसी ऑयल रिजर्व खोलने पर विचार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि ताइवान और दक्षिण कोरिया में तेल की कीमतें 30 साल के उच्चतम स्तर तक पहुंच सकती हैं।
भारत और ऑस्ट्रेलिया की स्थिति
भारत
India में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की सप्लाई सामान्य बनी हुई है। हालांकि विमान ईंधन यानी जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ने से हवाई किराए करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
इसके अलावा एलपीजी की डिलीवरी में भी देरी की खबरें सामने आ रही हैं। सरकार ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर कीमतों में बढ़ोतरी की जा सकती है।
ऑस्ट्रेलिया
Australia में तेल की सप्लाई में फिलहाल कोई बड़ी कमी नहीं है, लेकिन लोग संभावित संकट के डर से बड़ी मात्रा में तेल जमा कर रहे हैं।
इस डिमांड स्पाइक ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि इससे भविष्य में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट का संकट लंबा चलता है तो ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है और कई देशों को और कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।

