Iran Warning: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Masoud Pezeshkian ने अमेरिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। ईरान के राष्ट्रपति ने साफ कहा कि उनका देश बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी तरह के दबाव या धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान केवल सम्मान, ताकत और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के आधार पर ही किसी समझौते की ओर बढ़ेगा।
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने पुलिस बल ‘फराज’ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मौजूदा हालात पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि इस समय ईरान के सामने तीन रास्ते मौजूद हैं — सम्मानजनक बातचीत, “न युद्ध न शांति” जैसी स्थिति, या फिर खुला सैन्य संघर्ष। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की पहली प्राथमिकता कूटनीति और बातचीत ही है।
“ताकत के साथ होगी कूटनीति”
राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि ईरान कमजोर स्थिति से बातचीत नहीं करना चाहता। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की सैन्य ताकत और क्षेत्रीय प्रभाव को कूटनीतिक सफलता में बदलना जरूरी है।
उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि युद्ध के मैदान में हमारी सेना ने जो बढ़त हासिल की है, उसे कूटनीति की मेज पर भी सफलता में बदला जाए।” उनके इस बयान को सीधे तौर पर अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए संदेश माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह बातचीत के खिलाफ नहीं है, लेकिन किसी भी समझौते में अपनी शर्तों और राष्ट्रीय सम्मान को प्राथमिकता देगा।
ईरान ने रखीं अपनी प्रमुख मांगें
इस बीच Esmail Baghaei ने भी अमेरिका की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ईरान का प्रस्ताव केवल उसके अपने हितों के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
बघाई ने कहा कि ईरान की मांगें पूरी तरह वैध हैं। इनमें युद्ध का अंत, आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना, समुद्री गतिविधियों में कथित हस्तक्षेप रोकना और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस करना शामिल है।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवाजाही और क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखना चाहता है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है और यहां तनाव बढ़ने का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका की “मैक्सिमम प्रेशर” नीति पर निशाना
ईरान ने एक बार फिर अमेरिका की “मैक्सिमम प्रेशर” नीति की आलोचना की है। तेहरान का कहना है कि आर्थिक प्रतिबंधों और राजनीतिक दबाव के जरिए ईरान को झुकाने की कोशिश की जा रही है, जिसे वह स्वीकार नहीं करेगा।
ईरानी नेताओं का मानना है कि लगातार प्रतिबंधों और दबाव के बावजूद देश ने अपनी सैन्य और रणनीतिक क्षमता को मजबूत बनाए रखा है। इसी कारण अब ईरान बातचीत में भी बराबरी की स्थिति चाहता है।
ट्रंप ने जताई नाराजगी
दूसरी ओर Donald Trump ने ईरान की प्रतिक्रिया पर नाराजगी जाहिर की है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्हें ईरानी प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया “बिल्कुल पसंद नहीं आई” और यह “पूरी तरह अस्वीकार्य” है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने को लेकर बातचीत चल रही है।
क्षेत्रीय तनाव पर दुनिया की नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। खासतौर पर तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका बड़ा असर पड़ने की आशंका है।
फिलहाल दोनों देशों की बयानबाजी से साफ है कि तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कूटनीति तनाव कम करती है या हालात और अधिक जटिल हो जाते हैं।

