Iran War Impact: पाकिस्तान में स्कूल बंद, चार दिन का वर्क वीक लागू

Iran War Impact
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Iran War Impact: मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। ऊर्जा आपूर्ति में बाधा और बढ़ती तेल कीमतों के खतरे को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने कई सख्त कदमों का ऐलान किया है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने सोमवार को सरकारी खर्च कम करने और ईंधन बचाने के लिए कई बड़े फैसलों की घोषणा की। इन फैसलों में मंत्रियों के वेतन पर अस्थायी रोक, स्कूलों को बंद करना और सरकारी दफ्तरों में चार दिन का कार्य सप्ताह लागू करना शामिल है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि अगले दो महीनों तक सरकार अपने कुल खर्च में लगभग 20% की कटौती करेगी। इसके अलावा सरकारी विभागों की गाड़ियों के लिए मिलने वाले ईंधन को भी आधा कर दिया जाएगा, ताकि ऊर्जा की खपत कम की जा सके।

शहबाज़ शरीफ ने कहा कि क्षेत्रीय युद्ध और तनाव ने पाकिस्तान की मुश्किल से संभली अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा, “क्षेत्रीय स्थिति और युद्ध ने हमारी आर्थिक स्थिरता को प्रभावित किया है, लेकिन सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि आम जनता पर इसका अतिरिक्त बोझ न पड़े।”

दो हफ्ते बंद रहेंगे स्कूल

सरकार द्वारा घोषित ऊर्जा बचत उपायों के तहत अगले सप्ताह से देशभर में स्कूल दो सप्ताह के लिए बंद रहेंगे। वहीं विश्वविद्यालयों में पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से जारी रखी जाएगी।

इसके अलावा सरकार ने खर्चों में कटौती के लिए कई और कदम भी उठाए हैं। सरकारी अधिकारियों की अनावश्यक विदेशी यात्राओं पर रोक लगा दी गई है। सेमिनार और कॉन्फ्रेंस अब महंगे होटलों की बजाय सरकारी इमारतों में आयोजित किए जाएंगे।

सरकारी कर्मचारियों में से लगभग आधे कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी जाएगी। हालांकि स्वास्थ्य, सुरक्षा और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को नियमित रूप से काम करना होगा।

तेल कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता

पाकिस्तान उन एशियाई देशों में शामिल है जो वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। देश अपनी अधिकांश तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है।

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग Strait of Hormuz भी प्रभावित हुआ है। इस मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल की आपूर्ति होती है। इसके अलावा Qatar सहित कई ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में भी उत्पादन प्रभावित हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी का असर जल्द ही पाकिस्तान के घरेलू ईंधन दामों पर भी पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने और पाकिस्तानी रुपये पर दबाव पड़ने की आशंका है।

इसी बीच State Bank of Pakistan ने सोमवार को अपनी प्रमुख ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का हवाला दिया।

पुरानी ऊर्जा संकट की यादें ताजा

मौजूदा हालात ने पाकिस्तान के उस ऊर्जा संकट की यादें भी ताजा कर दी हैं, जब कुछ साल पहले देश को रोजाना कई घंटों की बिजली कटौती का सामना करना पड़ा था। उस समय सरकार को ऊर्जा बचत के लिए कई कड़े कदम उठाने पड़े थे, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा था।

हाल के वर्षों में पाकिस्तान सरकार ने अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए International Monetary Fund से वित्तीय सहायता भी ली थी। सरकार ने जुलाई 2025 से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए लगभग 4.2% आर्थिक विकास दर का लक्ष्य रखा था।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक तेल कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो यह आर्थिक सुधार की प्रक्रिया को कमजोर कर सकती हैं।

सीमित ईंधन भंडार

पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में कहा था कि देश के पास लगभग चार सप्ताह की जरूरत पूरी करने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। लेकिन इसके बावजूद ऊर्जा क्षेत्र में दबाव के संकेत दिखने लगे हैं।

देश की सबसे बड़ी गैस वितरण कंपनी ने कुछ औद्योगिक ग्राहकों के लिए गैस आपूर्ति में कटौती करने का फैसला किया है। इससे उद्योग और उत्पादन क्षेत्र पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

सरकार को उम्मीद है कि ये अस्थायी कदम देश को मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट से उबरने में मदद करेंगे और अर्थव्यवस्था को बड़े झटके से बचाया जा सकेगा।