Navratri Vastu Tips: हिंदू धर्म में Navratri के नौ दिनों को बेहद पवित्र और ऊर्जावान माना जाता है। मान्यता है कि इस समय ब्रह्मांडीय ऊर्जा पृथ्वी के सबसे करीब होती है और देवी शक्ति की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Vastu Shastra के अनुसार घर का मुख्य द्वार केवल प्रवेश का रास्ता नहीं होता, बल्कि इसे “सिंह द्वार” कहा जाता है, जहां से सुख-समृद्धि और माता लक्ष्मी का प्रवेश होता है। इसलिए नवरात्रि के दौरान मुख्य द्वार पर कुछ विशेष वस्तुएं रखने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं।
यदि आपके जीवन में लगातार रुकावटें आ रही हैं, तरक्की रुक गई है या घर में तनाव का माहौल बना रहता है, तो नवरात्रि के दौरान इन तीन उपायों को अपनाना बेहद शुभ माना जाता है।
1. आम और अशोक के पत्तों का वंदनवार
वास्तु शास्त्र में त्यौहारों के समय मुख्य द्वार पर वंदनवार या तोरण लगाना बहुत शुभ माना गया है। नवरात्रि के पहले दिन घर के पुराने तोरण को हटाकर ताजे पत्तों से बना नया वंदनवार लगाना चाहिए।
आम के पत्तों को नकारात्मक ऊर्जा को सोखने वाला माना जाता है, जबकि अशोक के पत्ते घर से दुख और शोक को दूर करने के प्रतीक माने जाते हैं। इन पत्तों को लाल कलावे या सूती धागे में पिरोकर दरवाजे पर इस तरह लगाएं कि घर में आने-जाने वाले हर व्यक्ति का स्पर्श उनसे हो सके।
अगर इन पत्तों के बीच-बीच में गेंदे के फूल लगाए जाएं तो यह और भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे गुरु ग्रह मजबूत होता है और घर में शुभ कार्यों में आने वाली बाधाएं कम होती हैं।
2. सिंदूर से बनाएं स्वास्तिक और लिखें शुभ-लाभ
वास्तु के अनुसार घर की चौखट को “देहरी” कहा जाता है और यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। नवरात्रि के दौरान इस स्थान की पूजा करना और शुभ चिन्ह बनाना घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रतीक माना जाता है।
प्लास्टिक या धातु के स्वास्तिक लगाने के बजाय अपने हाथों से शुद्ध सिंदूर या केसर को चमेली के तेल में मिलाकर स्वास्तिक बनाना ज्यादा शुभ माना जाता है। स्वास्तिक की चारों भुजाएं बराबर होनी चाहिए और उसके बीच में चार बिंदियां जरूर बनानी चाहिए, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रतीक मानी जाती हैं।
इसके साथ ही दरवाजे के दोनों ओर “शुभ” और “लाभ” लिखना भी बेहद मंगलकारी माना जाता है। यह उपाय व्यापार और नौकरी में आने वाली रुकावटों को कम करने के साथ-साथ घर में धन के आगमन के रास्ते भी खोलता है।
3. जल से भरा कलश या पीतल का पात्र
वास्तु शास्त्र में जल तत्व को शांति और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। नवरात्रि के दौरान घर के मुख्य द्वार के पास पानी से भरा पात्र रखना माता Durga के स्वागत का एक पारंपरिक तरीका माना जाता है।
इसके लिए पीतल या मिट्टी के चौड़े पात्र में साफ पानी भरें और उसमें ताजे गुलाब या गेंदे के फूल डालें। साथ ही उसमें एक कपूर की टिकिया और थोड़ा सा इत्र भी डाल सकते हैं।
इस पात्र को घर से बाहर निकलते समय मुख्य द्वार की दाईं ओर रखना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यह जल नकारात्मक ऊर्जा या बुरी नजर को अपनी ओर खींच लेता है और घर के सदस्यों को सुरक्षित रखता है। ध्यान रहे कि इस पानी को रोज बदलें और पुराने फूलों को किसी पौधे में डाल दें।
नवरात्रि में मुख्य द्वार के लिए कुछ जरूरी वास्तु नियम
द्वार की सफाई रखें: मुख्य द्वार के पास कभी भी जूते-चप्पलों का ढेर या कूड़ेदान नहीं रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार इससे राहु दोष बढ़ता है और अचानक नुकसान या दुर्घटना की आशंका बढ़ती है।
प्रकाश की व्यवस्था करें: शाम के समय मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाना या कम से कम एक बल्ब जरूर जलाना चाहिए। अंधेरा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।
कपूर का धुआं करें: सुबह और शाम की आरती के बाद कपूर जलाकर उसका धुआं पूरे घर में और खासतौर पर मुख्य द्वार पर दिखाना चाहिए। इससे वातावरण शुद्ध और ऊर्जावान बना रहता है।
नवरात्रि के दौरान किए गए ये छोटे-छोटे उपाय घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने और जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक माने जाते हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ इन उपायों को अपनाने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

