स्कूल एंग्जायटी बढ़ रही है: माता-पिता कैसे पहचानें चेतावनी संकेत

School anxiety
School anxiety

दुनियाभर में बच्चों और किशोरों में एंग्जायटी (School anxiety) (चिंता) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, और इसका असर सबसे ज्यादा स्कूल के माहौल में देखने को मिल रहा है। आज कई बच्चे स्कूल जाने से घबराते हैं, कक्षा में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते या पढ़ाई को लेकर अत्यधिक तनाव महसूस करते हैं। यह स्थिति उनके सीखने की क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित कर सकती है।

अच्छी बात यह है कि विशेषज्ञों के अनुसार इसके शुरुआती संकेत स्पष्ट होते हैं। अगर माता-पिता समय रहते इन संकेतों को पहचान लें, तो वे सही सहयोग देकर समस्या को गंभीर होने से रोक सकते हैं।

छात्रों में एंग्जायटी के मामलों में तेज बढ़ोतरी

हाल के वैश्विक शोधों में पाया गया है कि 10 से 24 वर्ष की आयु के युवाओं में एंग्जायटी डिसऑर्डर के मामलों में पिछले तीन दशकों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और 2019 के बाद इसमें तेजी आई है। विशेषज्ञ इसके पीछे कई कारण बताते हैं, जैसे—बुलिंग, आर्थिक असमानता, परीक्षा का दबाव और महामारी के दौरान हुई शैक्षणिक व सामाजिक बाधाएं।

अब स्कूल एंग्जायटी केवल “परीक्षा का सामान्य तनाव” नहीं रह गई है, बल्कि इसे एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता के रूप में देखा जा रहा है। इसलिए माता-पिता के लिए सजग रहना बेहद जरूरी है।

एंग्जायटी हमेशा साफ तौर पर दिखाई नहीं देती

बच्चों में एंग्जायटी हमेशा स्पष्ट डर या घबराहट के रूप में सामने नहीं आती। कई बार यह छोटे-छोटे व्यवहारिक या शारीरिक बदलावों के रूप में दिखाई देती है।

उदाहरण के लिए, अगर बच्चा छुट्टियों या बीमारी के बाद अचानक स्कूल जाने से मना करने लगे, तो यह एंग्जायटी का संकेत हो सकता है। बार-बार पेट दर्द या सिरदर्द की शिकायत, जो सप्ताहांत में ठीक हो जाती है, भी मानसिक तनाव का संकेत हो सकती है।

अन्य चेतावनी संकेतों में शामिल हैं:

  • नींद में परेशानी

  • भूख में कमी

  • पढ़ाई में गिरावट

  • चिड़चिड़ापन या मूड में बदलाव

छोटे बच्चे स्कूल छोड़ते समय माता-पिता से चिपक सकते हैं या दोस्तों से दूरी बना सकते हैं। वहीं बड़े बच्चे दूसरों द्वारा जज किए जाने का डर, परफेक्शनिज्म या परीक्षा को लेकर अत्यधिक चिंता दिखा सकते हैं।

इन व्यवहारों को केवल “सामान्य नर्वसनेस” समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। यह स्कूल से जुड़ी एंग्जायटी के संकेत हो सकते हैं।

माता-पिता क्या कदम उठा सकते हैं?

समय रहते हस्तक्षेप करना बेहद जरूरी है। सबसे पहले, बच्चों से शांत और भरोसेमंद बातचीत करें। उनकी भावनाओं को नकारने के बजाय उन्हें समझने और स्वीकार करने की कोशिश करें।

स्कूल से संपर्क बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। कई स्कूल मानसिक स्वास्थ्य जांच या काउंसलिंग की सुविधा देते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने से समस्या की जल्दी पहचान हो सकती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) बच्चों में एंग्जायटी कम करने में प्रभावी है। माता-पिता की मदद से ऑनलाइन या गाइडेड सीबीटी प्रोग्राम भी लाभदायक साबित हो सकते हैं।

छोटे कदम, बड़ा असर

माता-पिता निम्नलिखित सरल कदम उठा सकते हैं:

1. शांत और सहानुभूतिपूर्ण बातचीत करें:
बच्चे को खुलकर अपनी बात कहने दें।

2. स्कूल के साथ सहयोग करें:
शिक्षकों से नियमित संवाद बनाए रखें।

3. धीरे-धीरे स्कूल वापसी को प्रोत्साहित करें:
पूरी तरह से स्कूल से दूरी बनाने की आदत न बनने दें।

4. खुद का तनाव नियंत्रित रखें:
बच्चे अक्सर माता-पिता के व्यवहार से सीखते हैं।

5. स्वस्थ दिनचर्या बनाए रखें:
पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम सुनिश्चित करें।

स्कूल एंग्जायटी के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन समय रहते पहचान और सही समर्थन से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। माता-पिता अगर बच्चों के व्यवहार में सूक्ष्म बदलावों पर ध्यान दें और सहानुभूति के साथ प्रतिक्रिया दें, तो वे उनके आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन को मजबूत बना सकते हैं।

याद रखें, पढ़ाई जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है बच्चे का मानसिक स्वास्थ्य। सही समय पर उठाया गया कदम उनके भविष्य को सुरक्षित और मजबूत बना सकता है।