Iran School Missile Attack: 165 बच्चों की मौत पर बड़ा विवाद

Iran School Missile Attack
Iran School Missile Attack

Iran School Missile Attack: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ईरान के दक्षिणी शहर मिनाब में एक स्कूल पर हुए घातक मिसाइल हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में सामने आई एक स्वतंत्र जांच रिपोर्ट के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि इस हमले में अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। इस घटना में 165 से अधिक लोगों की मौत होने की बात कही जा रही है, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल बताए जा रहे हैं।

यह हमला 28 फरवरी को हुआ था और अब तक इसे लेकर कई तरह के दावे और जांच सामने आ चुके हैं। स्वतंत्र जांच समूह और ओपन-सोर्स विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों ने इस हमले से जुड़े वीडियो और सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन किया है। उनके मुताबिक उपलब्ध सबूत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जिस प्रकार की मिसाइल इस हमले में दिखाई दे रही है, वह टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल जैसी लगती है।

जांचकर्ताओं के मुताबिक एक छोटा वीडियो सामने आया है जिसमें एक मिसाइल को एक इमारत पर गिरते हुए देखा जा सकता है। यह वीडियो ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी द्वारा जारी किया गया था। बाद में स्वतंत्र जांचकर्ताओं ने वीडियो की लोकेशन और समय की पुष्टि करने की कोशिश की। विशेषज्ञों ने फ्रेम-दर-फ्रेम विश्लेषण करते हुए दावा किया कि वीडियो में दिखाई देने वाली मिसाइल का आकार और उड़ान पैटर्न टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल से काफी मिलता-जुलता है।

टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल को दुनिया की सबसे सटीक लंबी दूरी की मिसाइलों में से एक माना जाता है और इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से अमेरिका की सैन्य ताकत में किया जाता है। इसी वजह से यह दावा और भी ज्यादा विवाद का कारण बन गया है।

हालांकि अमेरिका ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। इस मामले में जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सवाल पूछा गया तो उन्होंने अमेरिका की भूमिका से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार यह विस्फोट संभवतः ईरान की ओर से हुआ हो सकता है और अमेरिका का इससे कोई संबंध नहीं है।

इसके बावजूद अमेरिका के रक्षा विभाग ने कहा है कि घटना को गंभीरता से लिया गया है और इसकी जांच की जा रही है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी सेना ने भी इस घटना को लेकर आंतरिक आकलन प्रक्रिया शुरू कर दी है। आमतौर पर ऐसी जांच तब शुरू की जाती है जब प्रारंभिक संकेत मिलते हैं कि किसी सैन्य कार्रवाई में अमेरिका की भूमिका हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि शुरुआती जानकारी के आधार पर यह संभावना पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता कि यह हमला अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का हिस्सा रहा हो। हालांकि अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है और जांच जारी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जिस स्कूल पर हमला हुआ वह ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के एक सैन्य ठिकाने के काफी करीब स्थित था। इसलिए यह भी संभावना जताई जा रही है कि सैन्य ठिकाने को निशाना बनाते समय स्कूल गलती से हमले की चपेट में आ गया हो।

सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से यह भी संकेत मिले हैं कि हमले के दौरान परिसर में एक से अधिक विस्फोट हुए थे। इससे यह संभावना और बढ़ जाती है कि यह एक लक्षित सैन्य कार्रवाई रही हो सकती है।

इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र और कई मानवाधिकार संगठनों ने इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी नागरिक स्कूल को जानबूझकर या लापरवाही से निशाना बनाया गया है तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पूरी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस हमले की वास्तविक जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा। हालांकि इस घटना ने पहले से ही तनावपूर्ण क्षेत्रीय माहौल को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।