Middle East Crisis: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध जैसे हालात के बीच पाकिस्तान की कूटनीति चर्चा का विषय बन गई है। एक तरफ पाकिस्तान सऊदी अरब को हर संभव समर्थन और सुरक्षा का भरोसा दे रहा है, वहीं दूसरी ओर वह ईरान के साथ भी लगातार संवाद बनाए हुए है। इसी वजह से कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक मान रहे हैं कि पाकिस्तान इस संकट के दौरान दोनों देशों के साथ संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।
हाल के घटनाक्रम में पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं की अलग-अलग कूटनीतिक पहलें सामने आई हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि इस क्षेत्रीय तनाव के बीच इस्लामाबाद अपनी रणनीतिक स्थिति को संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है।
सऊदी अरब को समर्थन का भरोसा
Shehbaz Sharif के प्रवक्ता Musharraf Zaidi ने एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान हर परिस्थिति में Saudi Arabia की मदद के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के रिश्ते लंबे समय से बेहद मजबूत रहे हैं और दोनों देश कठिन परिस्थितियों में हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं।
उनके शब्दों में, यह सवाल ही नहीं उठता कि पाकिस्तान सऊदी अरब की मदद करेगा या नहीं। अगर जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान हर हाल में सऊदी अरब के साथ खड़ा रहेगा। इस बयान को मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान के राष्ट्रपति से भी हुई बातचीत
उसी दिन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने Masoud Pezeshkian से फोन पर बातचीत भी की। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की।
शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति, स्थिरता और कूटनीतिक संवाद को बेहद जरूरी मानता है। उन्होंने सभी देशों से संयम बरतने और जिम्मेदारी के साथ स्थिति को संभालने की अपील की।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान Iran के साथ अपने ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को काफी महत्व देता है और दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करना चाहता है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भी कहा कि तेहरान पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय शांति बनाए रखने की दिशा में काम कर सकते हैं।
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ईरान के नए सुप्रीम लीडर को बधाई
इसी बीच पाकिस्तान के राष्ट्रपति Asif Ali Zardari ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei को बधाई भी दी।
इस कदम को कई विशेषज्ञ पाकिस्तान की संतुलित कूटनीति के संकेत के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि इस कदम से पाकिस्तान ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह ईरान के साथ भी अपने रिश्तों को बनाए रखना चाहता है।
सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौते की चर्चा
मौजूदा तनाव के बीच पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए Strategic Mutual Defense Agreement (SMDA) की भी चर्चा तेज हो गई है। यह समझौता सितंबर 2025 में हुआ था।
इस रक्षा समझौते के तहत अगर किसी एक देश पर हमला होता है तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसी कारण मौजूदा हालात में पाकिस्तान की भूमिका को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद बढ़ा तनाव
मिडिल ईस्ट में तनाव उस समय और बढ़ गया जब United States और Israel के हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei और कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हो गई।
इसके बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और गहरा गया।
पाकिस्तान का रुख: क्षेत्रीय युद्ध रोकना जरूरी
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मुशर्रफ जैदी ने कहा कि पाकिस्तान की कोशिश है कि यह टकराव किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध में न बदले।
उनके अनुसार पाकिस्तान का उद्देश्य अपने करीबी साझेदार देशों को बड़े युद्ध में उलझने से बचाना है, क्योंकि इससे पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता और आर्थिक विकास पर गंभीर असर पड़ सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि अगर सऊदी अरब को किसी भी तरह की मदद की जरूरत पड़ती है तो पाकिस्तान उसके साथ खड़ा रहेगा।
विश्लेषकों के अनुसार पाकिस्तान की मौजूदा कूटनीति इस बात का संकेत देती है कि वह एक ओर अपने पारंपरिक सहयोगी सऊदी अरब को आश्वस्त करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ भी रिश्ते खराब नहीं करना चाहता। यही वजह है कि मौजूदा संकट में उसकी रणनीति को संतुलन की कूटनीति कहा जा रहा है।

