पुलिस का ढुलमुल और एकतरफा रवैया से परेशान हुए वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कुमार शुक्ला

Senior Journalist Pradeep Shukla Upset with Police Bias
Senior journalist Pradeep Kumar Shukla expresses anger over the police’s biased and careless attitude, demanding fair investigation and accountability.

नोएडा, गत शनिवार- रविवार 9-10 अगस्त रात 11.55-12.40 बजे के दौरान की घटना का भुक्तभोगी हूं और पुलिस के एकदम उदासीन, उपेक्षित और एकतरफा रवैये से हैरान- परेशान होकर। यह घटना कुछेक सवालात के साथ संबंधित उच्चाधिकारियों- प्रशासन को गंभीर चिंतन और कार्रवाई हेतु बयान करता हूं।

मैं मेरे परिवार के साथ जिसमें तीन महिलाएं और हम दो पुरुष उबेर एक्सल राइड कैब से जिसे संबंधित कैब कंपनी से अटैच ड्राइवर कौशल किशोर कुमार अच्छे तरह से चला रहे थे और जब हम इस कैब से विश्वकर्मा रोड, सेक्टर-49 नौएडा, पिन- -201304 पर पहुंचे तो संदिग्ध और शायद नशे में लिप्त एक असामाजिक तत्व ने पहले एक आधी ईंट लहराई फिर पुरजोर ताकत से चलती गाड़ी में फैंक मारी जिससे कैब का पूरा शीशा टूटकर एकदम चूर चूर हो गया।

Read More: Diwali 2025: दीपावली पर मिलावटखोरों की खैर नहीं, 4 टीमें सख्त निगरानी में जुटी

उसके अधिकांश टुकड़े हमारे ऊपर आकर गिरे। उस के एकदम पास मैं था किसी तरह देवयोग से बाल -बाल बचा। तब तुरंत पुलिस को पीसीआर पर सारी घटना बताई। पर तमाम तरह -तरह की हील-हुज्जत के बाद 3-4 पुलिस कर्मी पीसीआर से आये और सारी बात हमसे सुन देखकर बहुत ही सहजता से बोले -कि क्या करें ये तो पागल है हम क्या करें। जबकि उन्होंने उससे कोई सख्ती, पूछताछ या अन्य उपाय नहीं करके इस घातक दुर्घटना को बहुत साधारण लिया।

ऐसा लगा कि वो एकतरफा रवैया अपना रहे थे। यहां पर मेरे ये सवाल हैं कि–

1. क्या अगर यही ईंट वो या कोई और नशेड़ी,माननीयों या इनकी या इनके परिवार के सदस्यों की निकली गाड़ी पर ऐसा घातक हमला करता तब भी ये लोग ऐसा ही कहके छोड़ देते?
2. क्या जैसा कि ये पुलिसवाले उसे विश्वास पूर्वक पागल कह रहे थे तो क्या ऐसे पागलों को खुलेआम किसी को भी जानमाल का नुक़सान करने का अधिकार दिया गया है?
3. क्या ऐसे पागलों को पुलिस या प्रशासन द्वारा पागलखाने पहुंचाने की जिम्मेदारी नहीं है।

ताकि आम जन को सुरक्षा मिल सके? 4. क्या ऐसे पागलों के खिलाफ कानूनी एक्शन लेना पुलिस के पास नहीं है? ये कुछेक सवाल हैं जो अत्यंत गंभीर हैं और तुरंत पुलिस, सरकार, प्रशासन को इन पर एक्शन लेकर कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि आमजन निश्चिंत होकर सफर कर सकें और सुरक्षित महसूस करें।

Read More: Inside Raisina Hill: वो फैसले जो भारत के प्रशासन का चेहरा बदल रहे हैं