Noida Interview Controversy: 8 घंटे बाद कैंडिडेट रिजेक्ट

Noida Interview Controversy
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Noida Interview Controversy: नोएडा के आईटी सेक्टर से जुड़ा एक मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपने इंटरव्यू अनुभव को साझा करते हुए आरोप लगाया है कि उसे घंटों तक इंतजार करवाया गया और आखिर में बिना किसी ठोस बातचीत के रिजेक्ट कर दिया गया। इस घटना ने कॉर्पोरेट वर्क कल्चर और भर्ती प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

वॉक-इन इंटरव्यू में 100 उम्मीदवार, लंबी प्रक्रिया

यह पूरा मामला एक पोस्ट के जरिए सामने आया, जो Reddit पर शेयर किया गया था। पोस्ट के अनुसार, नोएडा की एक सॉफ्टवेयर कंपनी ने वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित किया था, जिसमें करीब 100 उम्मीदवार शामिल हुए।

इंटरव्यू प्रक्रिया सुबह 11 बजे शुरू हुई और इसमें कई चरण शामिल थे:

  • ग्रुप डिस्कशन
  • दो तकनीकी राउंड
  • एक एचआर राउंड

दोपहर 2 बजे तक शुरुआती राउंड पूरे हो गए, जबकि शाम 4 बजे तक दूसरा तकनीकी राउंड भी खत्म हो गया। इस लंबी प्रक्रिया के बाद सिर्फ 6 उम्मीदवारों को अंतिम चरण यानी सीईओ राउंड के लिए चुना गया।

घंटों इंतजार के बाद शुरू हुआ आखिरी राउंड

फाइनल राउंड को लेकर उम्मीदवारों में उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं, लेकिन असली चुनौती अभी बाकी थी। कैंडिडेट्स को बिना किसी स्पष्ट जानकारी के घंटों तक इंतजार करवाया गया।

जो राउंड पहले होना चाहिए था, वह आखिरकार शाम 6:45 बजे शुरू हुआ। लंबे इंतजार के चलते कई उम्मीदवार बीच में ही चले गए, लेकिन 6 लोग आखिर तक टिके रहे, इस उम्मीद में कि उनका चयन हो सकता है।

सीईओ राउंड में हुआ चौंकाने वाला अनुभव

जब सॉफ्टवेयर इंजीनियर की बारी आई, तो उसका अनुभव बेहद निराशाजनक रहा। पोस्ट के मुताबिक, सीईओ ने उसके रिज्यूमे पर सरसरी नजर डाली और बिना कोई सवाल पूछे उसे खारिज कर दिया।

कैंडिडेट के अनुसार, सीईओ ने कहा कि रिज्यूमे में कुछ खास नजर नहीं आ रहा। जब उसने अपनी बात रखने की कोशिश की, तो बिना चर्चा के ही इंटरव्यू खत्म कर दिया गया।

इस अनुभव को साझा करते हुए कैंडिडेट ने लिखा कि उसे ऐसा लगा जैसे यह उसकी स्किल्स का टेस्ट नहीं, बल्कि यह देखने का तरीका था कि वह कितना अपमान सह सकता है।

सोशल मीडिया पर भड़की बहस

यह पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई लोगों ने इसे ‘टॉक्सिक वर्क कल्चर’ का उदाहरण बताया और कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

कुछ यूजर्स ने इस बात पर हैरानी जताई कि इतनी लंबी और जटिल प्रक्रिया एक ऐसी नौकरी के लिए अपनाई गई, जिसकी सैलरी अपेक्षाकृत कम थी।

एक यूजर ने व्यंग्य करते हुए लिखा कि इतनी कम सैलरी के लिए पांच राउंड का इंटरव्यू लेना ही अपने आप में अजीब है। वहीं, कई लोगों ने कहा कि इस तरह के अनुभव उम्मीदवारों का आत्मविश्वास तोड़ सकते हैं।

इंटरव्यू प्रक्रिया पर उठे सवाल

इस घटना ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा सामने रखा है—क्या कंपनियां उम्मीदवारों के समय और सम्मान का ध्यान रख रही हैं?

भर्ती प्रक्रिया सिर्फ कंपनी के लिए ही नहीं, बल्कि उम्मीदवार के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। एक पेशेवर और सम्मानजनक व्यवहार दोनों पक्षों के लिए जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • इंटरव्यू प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए
  • उम्मीदवारों को अनावश्यक इंतजार नहीं करवाना चाहिए
  • फीडबैक देना जरूरी है

कैंडिडेट का संदेश: सम्मान सबसे जरूरी

इस अनुभव के बाद कैंडिडेट ने एक अहम बात कही—इंटरव्यू एक दोतरफा प्रक्रिया है। अगर कोई कंपनी आपके समय और सम्मान की कद्र नहीं करती, तो वहां काम करना आपके लिए सही नहीं हो सकता।

यह संदेश कई लोगों को प्रेरित करता नजर आया, जिन्होंने इसे आत्मसम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया।

नोएडा का यह मामला सिर्फ एक इंटरव्यू अनुभव नहीं, बल्कि व्यापक वर्क कल्चर पर सवाल उठाता है। यह दिखाता है कि नौकरी की तलाश में उम्मीदवार किन चुनौतियों से गुजरते हैं।

आज के समय में जहां टैलेंट की कद्र की बात होती है, वहां इस तरह की घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या कंपनियां वास्तव में पेशेवर मूल्यों का पालन कर रही हैं।