Wheat Farming: देर से गेहूं की बुवाई में भी नहीं होगा नुकसान, जनवरी में बोई जाने वाली ये 5 किस्में देंगी रिकॉर्ड पैदावार

Wheat Farming
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 Wheat Farming: देश के कई कृषि क्षेत्रों में गन्ना और धान की देर से कटाई, मौसम की अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन के कारण गेहूं की समय पर बुवाई संभव नहीं हो पाती। ऐसे में जनवरी का महीना किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण बन जाता है। हालांकि, सही किस्मों का चयन करके किसान इस देरी के बावजूद अच्छी पैदावार और मुनाफा हासिल कर सकते हैं।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित गेहूं की कुछ उन्नत किस्में देर से बुवाई के लिए विशेष रूप से उपयुक्त मानी जाती हैं। इन किस्मों की मदद से किसान कम पानी, कम जोखिम और बेहतर उत्पादन के साथ खेती कर सकते हैं। आइए जानते हैं जनवरी में बुवाई के लिए उपयुक्त गेहूं की टॉप 5 किस्मों के बारे में।

1. PBW 550 (पीबीडब्ल्यू 550)

PBW 550 किस्म को खासतौर पर गन्ने की कटाई के बाद बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है। यह किस्म कम सिंचाई में भी अच्छा प्रदर्शन करती है। किसान इस किस्म से औसतन 22 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं। सीमित जल संसाधनों वाले क्षेत्रों में यह किस्म काफी उपयोगी साबित होती है।

2. DBW 234 (डीबीडब्ल्यू 234)

DBW 234 देर से बुवाई के लिए भरोसेमंद किस्म मानी जाती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह किस्म कम पानी में भी संतोषजनक उत्पादन देती है। यह 126 से 134 दिनों में तैयार हो जाती है और अनुकूल परिस्थितियों में 35 से 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार देने में सक्षम है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होने से फसल का जोखिम भी कम हो जाता है।

3. HD 3086 (एचडी 3086)

HD 3086 उच्च उत्पादन देने वाली लोकप्रिय किस्मों में से एक है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में यह किस्म बड़े पैमाने पर उगाई जाती है। सही प्रबंधन के साथ किसान 140 से 145 दिनों में 81 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की शानदार उपज प्राप्त कर सकते हैं। इसके दानों की गुणवत्ता बेहतरीन होने के कारण बाजार में इसकी मांग भी अधिक रहती है।

4. DBW 316 (डीबीडब्ल्यू 316)

पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे क्षेत्रों के लिए ICAR द्वारा अनुशंसित DBW 316 किस्म देर से बुवाई की स्थिति में बेहद कारगर है। जहां धान की कटाई देर से होती है, वहां यह किस्म किसानों को राहत देती है। इससे लगभग 68 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन संभव है। साथ ही इसमें प्रोटीन और जिंक की मात्रा अधिक होने के कारण बाजार में बेहतर दाम मिलने की संभावना रहती है।

5. HI 1634 (एचआई 1634)

HI 1634 किस्म मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के किसानों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसे समय पर या थोड़ी देरी से बोया जा सकता है। यह किस्म गर्मी को अच्छी तरह सहन करने की क्षमता रखती है। किसान इससे औसतन 51.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त कर सकते हैं।