Greenland Dispute: ग्रीनलैंड विवाद पर ब्रिटेन का ट्रंप पर हमला, टैरिफ धमकियों से बढ़ा ट्रांस-अटलांटिक तनाव

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Greenland Dispute: ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव और आयात शुल्क की धमकियों के बीच ब्रिटेन की संसद में उस समय राजनीतिक भूचाल आ गया, जब लिबरल डेमोक्रेट पार्टी के नेता एड डेविड ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा और असाधारण हमला बोला। डेविड ने ट्रंप को “अंतर्राष्ट्रीय गुंडा”, “बुली” और यहां तक कि “अमेरिका के इतिहास का सबसे भ्रष्ट राष्ट्रपति” करार दिया। उनके इन शब्दों ने न केवल संसद के माहौल को गरमा दिया, बल्कि ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में बढ़ते तनाव को भी उजागर कर दिया।

एड डेविड की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब ट्रंप ने ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने की धमकी दी है। ये वे देश हैं जो डेनमार्क के उस फैसले के समर्थन में खड़े हैं, जिसमें उसने ग्रीनलैंड को अमेरिका को सौंपने या बेचने से साफ इनकार कर दिया है। डेविड ने इस स्थिति को वैश्विक स्थिरता के लिए बेहद खतरनाक बताया और कहा कि मौजूदा समय दुनिया के लिए अत्यंत गंभीर है।

ब्रिटिश सांसद ने आरोप लगाया कि ट्रंप सहयोग और कूटनीति की जगह डराने, धमकाने और आर्थिक दबाव की राजनीति कर रहे हैं। उनके अनुसार, अमेरिका और ब्रिटेन के बीच दशकों पुराना “स्पेशल रिलेशनशिप” अब गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। डेविड ने कहा, “ट्रंप ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे कोई ताकतवर गुंडा, जिसे लगता है कि वह दबाव के जरिए किसी से भी कुछ भी छीन सकता है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ट्रंप नाटो जैसे अहम सैन्य गठबंधन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं और अपने सहयोगी देशों की संप्रभुता को खुले तौर पर चुनौती दे रहे हैं। डेविड का कहना था कि इस तरह की आक्रामक नीतियों से केवल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को फायदा हो रहा है, क्योंकि पश्चिमी देशों की एकता कमजोर पड़ रही है।

एड डेविड ने ब्रिटेन की मौजूदा लेबर सरकार और पिछली कंजरवेटिव सरकारों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ट्रंप को खुश करने, उनकी तारीफ करने और हर हाल में उनके साथ खड़े रहने की नीति पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। अब ब्रिटेन को यह तय करना होगा कि वह ट्रंप के दबाव के सामने डटकर खड़ा होगा या फिर “कुछ अरब डॉलर देकर उन्हें खुश करने” की रणनीति अपनाएगा।

तनाव उस समय और बढ़ गया जब ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ग्रीनलैंड को लेकर भड़काऊ पोस्ट साझा किए। इनमें अमेरिकी झंडे के साथ ग्रीनलैंड के फर्जी चित्र और ऐसा नक्शा शामिल था, जिसमें कनाडा और ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा दिखाया गया था। इन पोस्ट्स को कई यूरोपीय नेताओं ने उकसावे वाली राजनीति बताया।

ट्रंप का टकराव केवल ब्रिटेन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ भी तीखा रुख अपनाया और फ्रेंच वाइन व शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी। ट्रंप ने दावा किया कि इस दबाव के चलते मैक्रों उनके तथाकथित “बोर्ड ऑफ पीस” में शामिल होने को मजबूर हो जाएंगे। फ्रांस की मंत्री एनी जेनवार्ड ने इस रणनीति की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “क्रूर” और “ब्लैकमेल का हथियार” बताया।

वहीं अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने सहयोगी देशों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि अमेरिका के वैश्विक रिश्ते पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की आक्रामक बयानबाजी और टैरिफ धमकियां पश्चिमी देशों के बीच दरार को और गहरा कर सकती हैं।

कुल मिलाकर, ग्रीनलैंड विवाद और व्यापारिक दबाव की राजनीति ने अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगियों के रिश्तों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्रिटेन की संसद में उठा यह तीखा स्वर इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में तनाव और बढ़ सकता है।