India Pakistan Nuclear War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को रोकने का श्रेय खुद को देते नजर आए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि उनके हस्तक्षेप की वजह से दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच सैन्य टकराव रुक गया और एक बड़े परमाणु युद्ध को टाल दिया गया। ट्रंप के अनुसार, यदि वह इस प्रक्रिया में शामिल नहीं होते तो “लाखों लोग बेमौत मारे जाते।” दिलचस्प बात यह है कि यह दावा ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान अब तक लगभग 80 से 90 बार दोहरा चुके हैं।
अपने दूसरे कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर आयोजित 105 मिनट लंबे संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने कई बार भारत–पाकिस्तान तनाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “भारत और पाकिस्तान वास्तव में एक-दूसरे से लड़ रहे थे। आठ विमान गिराए गए थे और मेरे हिसाब से वे परमाणु युद्ध की ओर बढ़ रहे थे।” ट्रंप ने आगे कहा कि उनके हस्तक्षेप से स्थिति को नियंत्रण में लाया गया और एक बड़ी तबाही टल गई।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अपने पहले वर्ष में उन्होंने दुनिया भर में आठ ऐसे संघर्ष समाप्त कराए, जो लंबे समय से चल रहे थे। इनमें कंबोडिया–थाईलैंड, कोसोवो–सर्बिया, कांगो–रवांडा और भारत–पाकिस्तान जैसे विवाद शामिल हैं। राष्ट्रपति के मुताबिक, ये सभी संघर्ष वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बने हुए थे और अमेरिकी नेतृत्व के बिना इनका समाधान संभव नहीं था।
अपने बयान में ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ हुई एक कथित बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था कि ट्रंप की भूमिका की वजह से “एक करोड़ से ज्यादा लोगों की जान बची।” ट्रंप ने यह दोहराया कि भारत और पाकिस्तान दोनों के पास परमाणु हथियार हैं और ऐसे में किसी भी सैन्य टकराव के परिणाम बेहद भयावह हो सकते थे।
हालांकि, ट्रंप के इन दावों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने पहली बार 10 मई 2025 को सोशल मीडिया पर भारत–पाक संघर्ष रोकने का दावा किया था। इसके बाद से उन्होंने अलग-अलग मंचों, भाषणों, इंटरव्यू और प्रेस ब्रीफिंग में इस बात को बार-बार दोहराया। कुछ मौकों पर उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार प्रतिबंधों की धमकी देकर दोनों देशों को सीज़फायर के लिए मजबूर किया गया।
दूसरी ओर, भारत सरकार ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ रखा है। भारत ने कई बार स्पष्ट किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं हुई। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, सीमा पर उत्पन्न स्थिति को दोनों देशों के सैन्य जनरलों के बीच सीधी बातचीत के जरिए सुलझाया गया। भारत का कहना है कि यह प्रक्रिया द्विपक्षीय थी और इसमें किसी बाहरी नेता की भूमिका नहीं रही।
ट्रंप के दावों का मीडिया और विशेषज्ञों ने भी विश्लेषण किया है। कई विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति के बयान वास्तविक घटनाओं की तुलना में अतिशयोक्ति और राजनीतिक बयानबाज़ी अधिक प्रतीत होते हैं। आलोचकों के अनुसार, ट्रंप इन दावों के जरिए खुद को एक वैश्विक शांति दूत के रूप में पेश करना चाहते हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग रही है।
इसके बावजूद, ट्रंप अपने दावे से पीछे हटते नजर नहीं आते। हर नए मंच पर वह भारत–पाकिस्तान संघर्ष का उदाहरण देकर यह दोहराते हैं कि उनके नेतृत्व में दुनिया ने कई बड़े युद्धों से बचाव किया। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि ट्रंप अपने इन बयानों को किस तरह राजनीतिक लाभ में बदलते हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन दावों को किस नजर से देखता है।

