वॉशिंगटन: अमेरिका (America) और वेनेजुएला (Venezuela) के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। अमेरिकी कार्रवाई के बाद हालात और सख्त हो गए हैं और अब ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला को लेकर बेहद कड़े संकेत दिए हैं। अमेरिकी सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि अगर वेनेजुएला अपने तेल उत्पादन और निर्यात को बढ़ाना चाहता है, तो उसे अपनी विदेश नीति में बड़ा बदलाव करना होगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने वेनेजुएला की अंतरिम सरकार से अपेक्षा जताई है कि वह चीन, रूस, ईरान और क्यूबा जैसे देशों के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को सीमित या समाप्त करे। बदले में अमेरिका वेनेजुएला को तेल उत्पादन बढ़ाने और भारी कच्चे तेल की बिक्री में राहत देने को तैयार है। बताया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन चाहता है कि वेनेजुएला अपने तेल व्यापार में केवल अमेरिका को प्राथमिकता दे।
एबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट में तीन अज्ञात सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका की यह शर्त सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक भी है। इन चार देशों में रूस शामिल है, जिसे भारत का करीबी मित्र माना जाता है, इस वजह से यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक संवेदनशील हो जाता है। अमेरिका का मानना है कि वेनेजुएला का इन देशों पर दशकों से बना भरोसा उसके हितों के खिलाफ रहा है।
JUST IN: United States orders Venezuela to end all relations with China and Russia. pic.twitter.com/ZURkBbGuFq
— SilencedSirs◼️ (@SilentlySirs) January 7, 2026
दरअसल, ह्यूगो शावेज के दौर से लेकर निकोलस मादुरो के शासनकाल तक वेनेजुएला ने चीन, रूस, ईरान और क्यूबा के साथ मजबूत रिश्ते बनाए रखे। इन देशों ने आर्थिक संकट, प्रतिबंधों और राजनीतिक दबाव के दौर में वेनेजुएला को वित्तीय, सैन्य और तकनीकी सहयोग दिया। ऐसे में इन संबंधों को तोड़ना या कमजोर करना वेनेजुएला की विदेश नीति में ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि शर्तें न मानने की स्थिति में वेनेजुएला को तेल उत्पादन बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से इस मुद्दे पर कोई औपचारिक बयान अब तक सामने नहीं आया है।
इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा कि वेनेजुएला अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल तेल की आपूर्ति कर सकता है। मौजूदा बाजार कीमत के हिसाब से इसकी कीमत करीब 2.8 अरब डॉलर आंकी जा रही है। ट्रंप के मुताबिक, यह तेल बाजार दर पर खरीदा जाएगा और इससे होने वाली आय का उपयोग दोनों देशों के हित में किया जाएगा।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी प्रशासन जल्द ही अमेरिकी तेल कंपनियों के साथ वेनेजुएला में संभावित निवेश को लेकर बातचीत करेगा। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका वेनेजुएला पर नियंत्रण नहीं चाहता, लेकिन यह जरूर चाहता है कि देश का भविष्य तेल राजस्व के जरिए स्थिर और नियंत्रित दिशा में आगे बढ़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल वेनेजुएला की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार रखने वाले इस देश से जुड़ा कोई भी फैसला वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर गहरा असर डाल सकता है।

