होर्मुज़ पर नियंत्रण को लेकर चेतावनी, पूर्व पेंटागन सलाहकार का बड़ा बयान

Strait of Hormuz control
Strait of Hormuz control

Strait of Hormuz control: मध्य-पूर्व में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच हुए अस्थायी सीजफायर के बीच एक अहम वैश्विक चेतावनी सामने आई है। पूर्व पेंटागन सलाहकार Jasmine El-Gamal ने कहा है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz पर किसी एक देश का पूर्ण नियंत्रण स्वीकार्य नहीं होगा। उनके अनुसार, यदि कोई एक राष्ट्र वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति को नियंत्रित करने की स्थिति में आता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय संतुलन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

एल-गमाल का मानना है कि आने वाले समय में कई देश मिलकर “सामूहिक सुरक्षा” (collective security) का एक नया मॉडल विकसित करने की दिशा में काम कर सकते हैं। इस मॉडल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य सभी देशों के लिए सुरक्षित और खुला बना रहे, क्योंकि यह वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार के लिए जीवनरेखा माना जाता है।

उन्होंने बताया कि Oman पहले ही Iran के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि इस संवेदनशील मुद्दे का संतुलित समाधान निकाला जा सके। ओमान लंबे समय से क्षेत्रीय कूटनीति में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है और इस बार भी वह तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि, एल-गमाल ने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज़ के अलावा अन्य वैकल्पिक समुद्री मार्ग भी मौजूद हैं, जैसे Bab el-Mandeb, Suez Canal और Cape of Good Hope। लेकिन इन विकल्पों के बावजूद, होर्मुज़ का महत्व कम नहीं होता, क्योंकि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरने वाले तेल और गैस पर निर्भर है।

युद्ध के परिणाम पर टिप्पणी करते हुए एल-गमाल ने कहा कि यह तय करना बेहद मुश्किल है कि इस संघर्ष में वास्तव में कौन जीता। उनके अनुसार, United States जिस स्थिति में पहले था, वह अब उसी स्थिति में लौटने की कोशिश कर रहा है, इसलिए इसे स्पष्ट जीत नहीं कहा जा सकता। दूसरी ओर, Iran पर सैन्य और आर्थिक दबाव जरूर बढ़ा है, लेकिन उसका शासन अभी भी कायम है, जिससे यह कहना मुश्किल है कि वह पूरी तरह कमजोर हो गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की सैन्य क्षमताएं और उसके सहयोगी संगठन अभी भी सक्रिय हैं। Hezbollah और Houthi movement जैसे समूह भले ही कमजोर हुए हों, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। इसका मतलब है कि क्षेत्र में अस्थिरता और सुरक्षा जोखिम अभी भी बने रहेंगे।

एल-गमाल ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के लिए भी इस स्थिति को “जीत” के रूप में प्रस्तुत करना आसान नहीं बताया। उनका कहना है कि ईरान ने हमलों के बावजूद अपनी स्थिति बनाए रखी है, जिससे यह संघर्ष किसी एक पक्ष की स्पष्ट जीत के रूप में सामने नहीं आता।

उन्होंने अंत में चेतावनी दी कि असली चुनौती अब शुरू हुई है। आने वाले समय में कूटनीतिक बातचीत लंबी और जटिल हो सकती है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि मौजूदा सीजफायर कितने समय तक टिकेगा। यदि यह टूटता है, तो क्षेत्र में एक बार फिर बड़े पैमाने पर संघर्ष छिड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक शक्ति संतुलन का नया संघर्ष शुरू हो चुका है। यह केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। आने वाले समय में यह तय करेगा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

कुल मिलाकर, यह स्पष्ट है कि मध्य-पूर्व का यह संकट केवल एक युद्ध या सीजफायर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव की शुरुआत हो सकता है, जिसमें होर्मुज़ जैसे रणनीतिक मार्गों की भूमिका बेहद अहम होगी।