Japan Hormuz stance: जापान ने Strait of Hormuz में अपनी सैन्य मौजूदगी को लेकर साफ संकेत दिया है कि फिलहाल वह अपने सेल्फ-डिफेंस फोर्स (SDF) को तैनात करने का कोई इरादा नहीं रखता। यह जानकारी सरकार के मुख्य कैबिनेट सचिव Minoru Kihara ने दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में प्राथमिकता क्षेत्र में तनाव कम करने और समुद्री मार्गों पर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की है।
जापान का मानना है कि किसी भी सैन्य कदम से पहले शांति और स्थिरता बहाल होना जरूरी है। सरकार का रुख स्पष्ट है कि बिना हालात सामान्य हुए, किसी भी तरह की सैन्य तैनाती पर विचार नहीं किया जाएगा।
इससे पहले, जापान के विदेश मंत्री Toshimitsu Motegi ने संकेत दिया था कि यदि क्षेत्र में युद्धविराम हो जाता है और समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगें जहाजों के लिए खतरा बनती हैं, तो जापान अपनी उन्नत माइनस्वीपिंग तकनीक के जरिए सहायता प्रदान कर सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह मदद केवल तभी संभव होगी जब सभी पक्षों के बीच सीजफायर हो और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कार्रवाई की अनुमति मिले।
यह मुद्दा हाल ही में हुए जापान-अमेरिका शिखर सम्मेलन में भी चर्चा का विषय रहा, जहां Donald Trump ने जापान की संवैधानिक सीमाओं को ध्यान में रखने की बात कही। दरअसल, जापान का संविधान उसकी सैन्य गतिविधियों पर कई तरह की पाबंदियां लगाता है, जिसके चलते वह सीधे युद्ध जैसे हालात में हस्तक्षेप करने से बचता है।
वर्तमान में ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।
जापान के लिए यह स्थिति खास तौर पर संवेदनशील है, क्योंकि वह अपनी 90 प्रतिशत से अधिक तेल जरूरतों के लिए मध्य-पूर्व पर निर्भर है। ऐसे में होरमुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा उसके लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
फिलहाल जापान बेहद सावधानी से कदम उठा रहा है। वह सीधे सैन्य भूमिका निभाने के बजाय कूटनीतिक प्रयासों और शांति बहाली को प्राथमिकता दे रहा है, ताकि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।

