Beirut Attack में IRGC कुद्स फोर्स के रेजा खजाई मारे गए? इजरायल का बड़ा दावा

Beirut Attack
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Beirut Attack: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल ने एक बड़ा दावा किया है। Israel Defense Forces (IDF) ने मंगलवार को कहा कि लेबनान की राजधानी Beirut में किए गए एक नौसैनिक हमले में ईरान की कुद्स फोर्स के वरिष्ठ अधिकारी रेजा खजाई की मौत हो गई है। इजरायली सेना के अनुसार यह ऑपरेशन सोमवार देर रात अंजाम दिया गया और इसमें खजाई को विशेष रूप से निशाना बनाया गया।

IDF के बयान में कहा गया कि यह हमला “सटीक खुफिया जानकारी” के आधार पर किया गया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है और न ही अभी तक ईरान या हिजबुल्ला की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

कौन थे रेजा खजाई?

इजरायली सेना के मुताबिक, रेजा खजाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की कुद्स फोर्स में वरिष्ठ पद पर तैनात थे। कुद्स फोर्स, IRGC की वह विशेष इकाई है जो विदेशों में सैन्य और रणनीतिक अभियानों का संचालन करती है।

IDF का दावा है कि खजाई लेबनान कोर में प्रमुख भूमिका निभा चुके थे और उन्हें कोर कमांडर का “दाहिना हाथ” माना जाता था। बताया जा रहा है कि उन्होंने हिजबुल्ला को संगठित सैन्य ढांचा देने और उसकी क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इजरायली अधिकारियों का कहना है कि खजाई की भूमिका केवल सलाहकार तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह रणनीतिक योजनाओं के क्रियान्वयन में सीधे तौर पर शामिल थे।

हिजबुल्ला और ईरान के बीच अहम कड़ी

IDF के अनुसार, खजाई Hezbollah और ईरान के बीच मुख्य संपर्क सूत्र के रूप में काम करते थे। वह हिजबुल्ला की जरूरतों और ईरान से मिलने वाले संसाधनों के बीच पुल का काम कर रहे थे।

इजरायल का आरोप है कि खजाई ईरान से लेबनान तक हथियारों के ट्रांसफर की निगरानी करते थे और इस पूरी आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाए रखते थे।

इसके अलावा, 2023–2024 के संघर्ष के बाद हिजबुल्ला की हमलावर क्षमता को दोबारा मजबूत करने की प्रक्रिया में भी उनकी अहम भूमिका बताई जा रही है। IDF का कहना है कि उन्होंने रॉकेट और मिसाइल क्षमताओं को फिर से स्थापित करने में नेतृत्व किया।

हथियार निर्माण कार्यक्रम पर निगरानी

इजरायली सेना ने यह भी दावा किया है कि खजाई लेबनान में हिजबुल्ला के हथियार निर्माण कार्यक्रम की देखरेख कर रहे थे। वह ईरानी हथियारों और तकनीकी उपकरणों के जरिए संगठन को फिर से खड़ा करने की कोशिश में जुटे थे।

इजरायल इस कार्रवाई को हिजबुल्ला की सैन्य क्षमता पर “रणनीतिक और निर्णायक वार” बता रहा है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह दावा सही साबित होता है तो इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है।

क्षेत्रीय तनाव और संभावित असर

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इजरायल, हिजबुल्ला और ईरान के बीच पहले से ही तनाव चरम पर है। गाजा युद्ध और दक्षिणी लेबनान में लगातार झड़पों के बीच बेरूत में सीधे हमले की खबर ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान या हिजबुल्ला इस दावे की पुष्टि करते हैं, तो जवाबी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, लेबनान की आंतरिक स्थिति भी इस घटनाक्रम से प्रभावित हो सकती है, क्योंकि राजधानी में हुआ हमला सुरक्षा और संप्रभुता के सवाल खड़े करता है।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस घटनाक्रम पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह हमला क्षेत्रीय संघर्ष को और भड़काता है या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव को कम करने की कोशिश की जाती है।