Iran Warning: मध्य-पूर्व में जारी भीषण संघर्ष अब और खतरनाक मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। जंग के चौथे दिन ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ खुली चेतावनी जारी करते हुए बड़े हमलों की कसम खाई है। Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैऩी ने सरकारी टीवी पर बयान देते हुए कहा कि “दुश्मन दंडात्मक और लगातार हमलों का इंतजार करे। अमेरिका और इजरायल के लिए जहन्नुम के दरवाजे हर पल और ज्यादा खुलेंगे।” इस बयान के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
यह संघर्ष उस समय भड़का जब United States और Israel ने शनिवार को ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। ईरानी अधिकारियों के अनुसार इन हमलों में सैन्य ठिकानों के साथ-साथ कुछ प्रशासनिक परिसरों को भी नुकसान पहुंचा है। ईरानी रेड क्रिसेंट का दावा है कि अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। हालांकि स्वतंत्र रूप से इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं हो पाई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि यह टकराव पांच सप्ताह या उससे अधिक समय तक जारी रह सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने हितों और सहयोगियों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। वहीं इजरायल ने भी स्पष्ट किया है कि वह ईरान समर्थित गुटों की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा।
ब्रिटिश एयरबेस पर हमला, खाड़ी देशों को सख्त संदेश
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में साइप्रस स्थित ब्रिटिश RAF बेस को निशाना बनाने का दावा किया है। इसके साथ ही उसने खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि वे अमेरिका या इजरायल को किसी भी प्रकार का सैन्य सहयोग न दें। तेहरान ने यूरोपीय देशों को भी आगाह किया है कि वे इस संघर्ष में हस्तक्षेप से बचें। हालांकि ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने अपने-अपने हितों की रक्षा के लिए “रक्षात्मक कदम” उठाने की बात कही है।
ईरान की सबसे गंभीर चेतावनी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी है। तेहरान ने साफ संकेत दिया है कि अगर युद्ध और बढ़ा तो वह Strait of Hormuz को बंद करने पर विचार कर सकता है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। एक वरिष्ठ IRGC कमांडर ने दावा किया कि अगर यह मार्ग बाधित हुआ तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ेगा।
तेहरान में बमबारी और लेबनान में सैन्य गतिविधि
इजरायली वायुसेना ने रात भर तेहरान में राष्ट्रपति कार्यालय परिसर और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल भवन पर हमले किए। इजरायली सेना का कहना है कि उसने “ईरानी नेतृत्व के रणनीतिक ढांचे” को निशाना बनाया है। इन हमलों के बाद राजधानी तेहरान में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
इसी बीच इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। रक्षा मंत्री Israel Katz ने हिज़्बुल्लाह द्वारा रॉकेट हमलों के बाद अतिरिक्त क्षेत्रों पर नियंत्रण की अनुमति दी है। हालांकि इजरायली सेना ने इसे पूर्ण “ग्राउंड ऑपरेशन” न बताते हुए “फॉरवर्ड डिफेंस” करार दिया है। नवंबर 2024 से इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान के कुछ रणनीतिक स्थानों पर पहले से तैनात है।
लेबनानी सेना ने भी सीमा के कुछ ठिकानों से अपने सैनिकों को हटाया है। सुरक्षा कारणों से 8–9 सैनिकों की टुकड़ियों को बेस पर वापस बुलाए जाने की खबर है। क्षेत्र में लगातार रॉकेट और ड्रोन हमलों की आशंका बनी हुई है।
व्यापक युद्ध का खतरा
विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया तो यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिका की सक्रियता को देखते हुए स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है। ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ रही है और वैश्विक समुदाय इस संकट पर नजर बनाए हुए है।
फिलहाल मध्य-पूर्व में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। ईरान और इजरायल दोनों ही अपने रुख पर अडिग नजर आ रहे हैं, जबकि अमेरिका की सीधी भागीदारी ने इस टकराव को और जटिल बना दिया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कूटनीतिक प्रयास कामयाब होते हैं या क्षेत्र और बड़े युद्ध की ओर बढ़ता है।

