ISIS कैदी ट्रांसफर: सीरिया से इराक आए 9,000 आतंकियों पर ट्रायल

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इराक सरकार ने साफ कर दिया है कि सीरिया की जेलों और हिरासत शिविरों से लाए जा रहे इस्लामिक स्टेट (ISIS) के आतंकियों पर इराक की अदालतों में मुकदमा चलाया जाएगा। यह फैसला अमेरिका की मध्यस्थता में हो रहे कैदियों के स्थानांतरण के बीच लिया गया है। इराक की सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने सुरक्षा और राजनीतिक नेतृत्व की एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद इसकी आधिकारिक घोषणा की।

इस बैठक में करीब 9,000 ISIS कैदियों के भविष्य पर चर्चा हुई, जो 2019 में संगठन की हार के बाद से सीरिया में बंद थे। इराकी अधिकारियों का कहना है कि इन कैदियों को अपने देश लाकर कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा देना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से जरूरी हो गया है।

सीरिया में बदले हालात बने वजह

पिछले महीने सीरिया में नई सरकार की सेनाओं ने पूर्वोत्तर इलाकों से कुर्द-नेतृत्व वाले बलों को हटा दिया था। यही कुर्द बल, जो लंबे समय तक अमेरिका के सहयोगी रहे, ISIS कैदियों को जेलों और शिविरों में सुरक्षित रखे हुए थे। उनके हटने के बाद सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ने की आशंका बढ़ गई।

सीरियाई सेना ने अल-होल कैंप पर नियंत्रण कर लिया, जहां हजारों महिलाएं और बच्चे रह रहे हैं, जिन्हें ISIS आतंकियों के परिजन माना जाता है। इसके अलावा, शद्दादेह कस्बे की एक जेल भी सेना के कब्जे में आई। इस दौरान अफरा-तफरी के माहौल में कुछ कैदी फरार हो गए थे, हालांकि बाद में कई को दोबारा पकड़ लिया गया।

स्लीपर सेल के खतरे से चिंता

इन घटनाओं के बाद यह डर और गहरा हो गया कि ISIS अपने स्लीपर सेल को फिर से सक्रिय कर सकता है या फरार कैदी इराक में घुसकर हमलों को अंजाम दे सकते हैं। इसी संभावित खतरे को देखते हुए इराक ने फैसला किया कि कैदियों को अपने देश लाकर उनसे सख्ती से निपटा जाएगा।

इराकी सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने बताया कि इराक पहुंचने के बाद सभी ISIS कैदियों से पहले सुरक्षा एजेंसियां गहन पूछताछ करेंगी। इसके बाद आतंकवाद से जुड़े आरोपों के तहत उन्हें इराकी अदालतों में पेश किया जाएगा और कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

हवाई मार्ग से हो रहा ट्रांसफर

अमेरिकी सेना ने शुक्रवार से ISIS कैदियों को हवाई मार्ग के जरिए इराक लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रविवार को 125 कैदियों को इराक लाया गया। अब तक कुल 275 कैदी इराक पहुंच चुके हैं। यह प्रक्रिया आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है।

दमिश्क और वॉशिंगटन दोनों ने इराक के इस फैसले का समर्थन किया है। वहीं इराकी संसद भी सीरिया की मौजूदा स्थिति और सीमा सुरक्षा को लेकर अलग से बैठक करने जा रही है।

खत्म नहीं हुआ ISIS का खतरा

हालांकि ISIS को इराक में 2017 और सीरिया में 2019 में सैन्य रूप से पराजित किया जा चुका है, लेकिन संगठन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उसके स्लीपर सेल अब भी दोनों देशों में समय-समय पर घातक हमले कर रहे हैं। इसी वजह से इराक किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाए हुए है।