मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर भारत के कई राज्यों के लिए भारी बारिश, तेज हवाओं और ठंड को लेकर चेतावनी जारी की है। आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम का मिजाज तेजी से बदलेगा। 27–28 जनवरी को जहां हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है, वहीं 31 जनवरी और 1 फरवरी को एक और मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। इसे देखते हुए IMD ने 11 राज्यों में येलो अलर्ट जारी किया है और 1 फरवरी तक सतर्क रहने की सलाह दी है।
बारिश और तेज हवाओं से बढ़ेगी ठंड
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा समेत आसपास के इलाकों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इन हवाओं के साथ होने वाली बारिश से तापमान में तेजी से गिरावट आएगी, जिससे ठंड और ज्यादा महसूस होगी। खासतौर पर खुले में काम करने वाले लोगों और किसानों को इस दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
पहाड़ों में बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों पर
कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। पहाड़ों पर जमी बर्फ का असर मैदानी राज्यों में भी महसूस होगा। बारिश थमने के बाद उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाएं चलेंगी, जिससे रात के तापमान में और गिरावट आ सकती है।
कोहरे से यातायात प्रभावित होने की आशंका
उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब के तराई क्षेत्रों में सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। कोहरे के कारण सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है। दृश्यता कम होने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए वाहन चालकों को धीमी गति से चलने, हेडलाइट और फॉग लाइट का सही इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
ठंड की लहर का अलर्ट
विशेषज्ञों का कहना है कि 28 जनवरी के बाद पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ सकता है, लेकिन इसके बाद ठंड का असर और तेज होगा। साफ आसमान और ठंडी हवाओं के चलते न्यूनतम तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। जनवरी के आखिरी दिनों और फरवरी के पहले सप्ताह में कड़ाके की सर्दी बने रहने की संभावना है।
स्वास्थ्य और खेती पर असर
मौसम में अचानक बदलाव से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। ठंडी हवाओं और बारिश के कारण सर्दी-जुकाम, खांसी और सांस से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वहीं किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी तैयार फसलों को सुरक्षित रखें और मौसम पूर्वानुमान के अनुसार ही सिंचाई या अन्य कृषि कार्य करें।

