Hormuz: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। Iran ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसके तेल टैंकरों या वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया गया, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दुश्मन के युद्धपोतों पर “भीषण हमले” किए जाएंगे। ईरान की इस चेतावनी ने पहले से तनावग्रस्त Strait of Hormuz क्षेत्र में युद्ध की आशंका को और बढ़ा दिया है।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना की ओर से जारी यह बयान शनिवार को ईरानी सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित किया गया। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले अमेरिकी सेना ने कथित तौर पर ईरान के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया था। हालांकि फिलहाल दोनों देशों के बीच नाजुक युद्धविराम बना हुआ दिखाई दे रहा है, लेकिन हालिया घटनाओं ने स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है।
अमेरिकी सेना का कहना है कि जिन टैंकरों को निशाना बनाया गया, वे अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। अमेरिका का दावा है कि उसने जलडमरूमध्य में अपने नौसैनिक जहाजों पर संभावित हमलों को भी विफल किया और जवाबी कार्रवाई में ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
इसके बाद ईरान ने बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि उसके तेल टैंकरों या कारोबारी जहाजों पर किसी भी तरह की कार्रवाई को सीधा हमला माना जाएगा और इसका जवाब अमेरिकी सैन्य अड्डों तथा सहयोगी पोतों पर बड़े हमलों के जरिए दिया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच Bahrain ने भी बड़ा दावा किया है। बहरीन के गृह मंत्रालय ने शनिवार को घोषणा की कि उसने 41 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े होने का आरोप है। मंत्रालय के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है और मामले की जांच की जा रही है।
बहरीन की स्थिति इस मामले में बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि यहां अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है। बहरीन में सुन्नी शासक परिवार सत्ता में है, जबकि देश की बड़ी आबादी शिया समुदाय से जुड़ी हुई है। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि बहरीन सरकार ईरान-अमेरिका तनाव का इस्तेमाल घरेलू विरोध को दबाने के लिए कर रही है।
इस बीच, ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख Ebrahim Azizi ने सोशल मीडिया पर चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका समर्थित प्रस्तावों का समर्थन करने के गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए जीवन रेखा जैसा है और इसे ईरान के खिलाफ इस्तेमाल करने की कोशिश खतरनाक साबित हो सकती है।
गौरतलब है कि फरवरी 2026 में अमेरिका और Israel द्वारा ईरान के खिलाफ कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसके बाद ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही काफी हद तक प्रभावित कर दी थी। इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और ईंधन की कीमतों पर साफ दिखाई दिया।
दुनिया के बड़े हिस्से की तेल सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा संकट पर पड़ सकता है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए United Kingdom ने भी क्षेत्र में अपना युद्धपोत भेजने का फैसला किया है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसका युद्धपोत HMS Dragon पश्चिम एशिया में तैनात किया जाएगा ताकि जरूरत पड़ने पर होर्मुज क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वहीं France ने भी संकेत दिए हैं कि वह अपने विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप को लाल सागर क्षेत्र में भेजने की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो पूरा पश्चिम एशिया एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।
फिलहाल दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हुई है, क्योंकि यहां होने वाली हर गतिविधि वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को सीधे प्रभावित कर सकती है।

