ईरान के खार्ग द्वीप के पास बड़ा तेल रिसाव, Gulf में खतरा

Kharg Island
Kharg Island

ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्रों में शामिल Kharg Island के पास फारस की खाड़ी में बड़े तेल रिसाव की खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए सामने आई इस घटना ने न केवल पर्यावरणीय संकट की आशंका पैदा कर दी है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय तनाव को लेकर भी नई चिंताएं बढ़ा दी हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यूरोपियन स्पेस एजेंसी के Copernicus Sentinel-2 सैटेलाइट द्वारा ली गई तस्वीरों में खार्ग द्वीप के पश्चिमी तट के पास समुद्र में फैला विशाल ऑयल स्लिक दिखाई दिया है। वैश्विक मॉनिटरिंग एजेंसी ऑर्बिटल EOS के अनुमान के मुताबिक यह तेल रिसाव करीब 20 वर्ग मील से अधिक क्षेत्र में फैल चुका है।

माना जा रहा है कि लगभग 3,000 बैरल से ज्यादा कच्चा तेल फारस की खाड़ी के पानी में बह गया हो सकता है। हालांकि अभी तक इस रिसाव की सटीक वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री गतिविधियों पर दबाव के कारण ईरान की तेल अवसंरचना पर भारी असर पड़ा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक Strait of Hormuz के आसपास बढ़ते तनाव और अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंधों के चलते कई तेल टैंकर समुद्री मार्गों में फंसे हुए हैं। जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से ईरान के ऑफशोर टर्मिनलों, पाइपलाइन नेटवर्क और तेल भंडारण सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। इसी कारण दुर्घटनाओं और रिसाव का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस तेल रिसाव को नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसका असर समुद्री पर्यावरण पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गुरुवार तक यह तेल का विशाल धब्बा दक्षिण दिशा में बहते हुए Saudi Arabia के समुद्री क्षेत्र की ओर बढ़ता दिखाई दिया। इससे समुद्री जीवों, तटीय पारिस्थितिकी तंत्र और मछली उद्योग को बड़ा नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

अब तक ईरानी सरकार की ओर से इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ईरान के सरकारी मीडिया और विदेश मंत्रालय ने भी इस मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। इससे स्थिति को लेकर और अधिक अटकलें लगाई जा रही हैं।

खार्ग द्वीप को ईरान की तेल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यहां देश का सबसे बड़ा ऑयल टर्मिनल, विशाल स्टोरेज टैंक, निर्यात पाइपलाइन और ऊर्जा सुविधाएं मौजूद हैं। ईरान की कुल तेल आय का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस इलाके में किसी भी तरह की तकनीकी खराबी या दुर्घटना का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है।

इस बीच, The Wall Street Journal की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच अगले सप्ताह Islamabad में नई वार्ता शुरू हो सकती है। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच 14 बिंदुओं वाले एक समझौता ज्ञापन पर मध्यस्थों के जरिए बातचीत चल रही है।

गौरतलब है कि फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया था। इसके बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति लगातार प्रभावित हो रही है। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है, इसलिए यहां होने वाली किसी भी घटना का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर तुरंत दिखाई देता है।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर फारस की खाड़ी की स्थिति पर बनी हुई है। यदि तेल रिसाव और क्षेत्रीय तनाव दोनों साथ-साथ बढ़ते हैं, तो आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।