LPG OTP Rule: देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी के लिए लागू किए गए OTP आधारित सत्यापन सिस्टम को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी डिलीवरी रोकने के लिए शुरू की गई है, लेकिन ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लाखों उपभोक्ताओं के लिए यही सिस्टम अब बड़ी परेशानी बनता दिखाई दे रहा है।
इस मामले में अब Bombay High Court की नागपुर बेंच ने भी चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे इस व्यवस्था पर दोबारा विचार करें और ऑफलाइन गैस बुकिंग तथा डिलीवरी विकल्प जारी रखने की संभावना पर भी ध्यान दें।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं पहले से बढ़ी हुई हैं। ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के कारण दुनियाभर में ईंधन और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में भारत में घरेलू गैस वितरण व्यवस्था में आने वाली दिक्कतों ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
सरकारी तेल कंपनियों द्वारा लागू नए नियमों के अनुसार अब 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी के लिए OTP आधारित डिजिटल सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। यानी ग्राहक को गैस सिलेंडर प्राप्त करने से पहले मोबाइल पर आए OTP को डिलीवरी एजेंट को बताना होगा, तभी सिलेंडर की डिलीवरी पूरी मानी जाएगी।
कंपनियों का दावा है कि इससे फर्जी बुकिंग, डुप्लीकेट डिलीवरी और गड़बड़ियों पर रोक लगेगी। लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग नजर आ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में कमजोर मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट की कमी और तकनीकी समस्याओं के कारण उपभोक्ताओं को समय पर OTP नहीं मिल पा रहा है। कई बार सर्वर डाउन होने या संदेश देर से पहुंचने के कारण सिलेंडर वितरण में लंबी देरी हो रही है।
इस मुद्दे को लेकर LPG Distributors Association (India) के अध्यक्ष Jaiprakash Tiwari ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि नई व्यवस्था के कारण न सिर्फ ग्राहक परेशान हैं बल्कि गैस एजेंसियों और डिलीवरी कर्मचारियों पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि शुरुआत में यह OTP आधारित सिस्टम केवल लगभग 50 प्रतिशत डिलीवरी के लिए लागू किया गया था। बाद में इसे बढ़ाकर 95 प्रतिशत कर दिया गया और अप्रैल 2026 में जारी निर्देशों के बाद इसे 100 प्रतिशत डिलीवरी के लिए अनिवार्य बना दिया गया।
याचिका में यह भी बताया गया कि तेल कंपनियों ने चेतावनी दी है कि बिना OTP सत्यापन के यदि किसी ग्राहक को सिलेंडर दिया गया तो संबंधित डिस्ट्रीब्यूटर के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इससे गैस एजेंसियों में डर और असमंजस की स्थिति बन गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई बुजुर्ग उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है या वे डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल ठीक से नहीं कर पाते। कई परिवारों में एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग होता है, जिससे OTP सत्यापन और भी मुश्किल हो जाता है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि डिजिटल व्यवस्था लागू करना अच्छी बात है, लेकिन जमीनी हकीकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि किसी क्षेत्र में नेटवर्क और तकनीकी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं, तो लोगों को जरूरी सेवाओं से वंचित नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने सरकार और तेल कंपनियों से यह भी पूछा है कि क्या डिजिटल सिस्टम के साथ-साथ ऑफलाइन विकल्प भी जारी रखे जा सकते हैं ताकि आम लोगों को परेशानी न हो।
अब इस मामले पर आगे की सुनवाई में फैसला लिया जाएगा कि सरकार OTP आधारित अनिवार्य नियम में बदलाव करती है या फिर उपभोक्ताओं के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाती है। फिलहाल देशभर में लाखों एलपीजी उपभोक्ता इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

