Iran Protest: ईरान में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। इंटरनेट और टेलीफोन सेवाओं पर कड़े प्रतिबंधों के बावजूद देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन पाबंदियों के कारण ईरान का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग कट गया है, जिससे जमीनी हालात की स्वतंत्र पुष्टि करना मुश्किल हो गया है।
अमेरिका स्थित संगठन ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स’ के अनुसार, अब तक इन प्रदर्शनों में कम से कम 65 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। संगठन का दावा है कि सुरक्षाबलों ने कई शहरों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।
इस बीच, अमेरिका की ओर से दी जा रही चेतावनियों के बावजूद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सरकार की कठोर नीति जारी रखने के संकेत दिए हैं। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक वीडियो संदेश में खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका के हाथ ईरानियों के खून से सने हैं। उनके संबोधन के दौरान समर्थकों को “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे लगाते हुए देखा गया।
ईरान के सरकारी मीडिया ने प्रदर्शनकारियों को “आतंकवादी” करार दिया है, जिससे हालिया वर्षों की तरह हिंसक दमन की आशंका और बढ़ गई है। खामेनेई ने तेहरान स्थित अपने परिसर में समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी विदेशी ताकतों को खुश करने के लिए अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं।
दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि अमेरिका ईरान के “बहादुर लोगों” के साथ खड़ा है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनियों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी होती है, तो अमेरिका कड़ी प्रतिक्रिया देगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी संभावित कार्रवाई का मतलब ज़मीनी सैन्य हस्तक्षेप नहीं होगा, बल्कि ऐसे ठिकानों पर हमला किया जाएगा जहां सबसे अधिक प्रभाव पड़े। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को चेतावनी देते हुए कहा कि हिंसा शुरू करने की कीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी।
ईरान की न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसिनी-इजेई ने साफ किया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।
इस बीच सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में उत्तरी तेहरान के सादत आबाद इलाके में हजारों लोगों को सड़कों पर उतरते देखा गया है। कुछ प्रदर्शनकारियों को खामेनेई विरोधी नारे लगाते हुए भी सुना गया है।
ईरान के निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने लोगों से प्रदर्शन जारी रखने की अपील की है और पुराने ईरानी झंडे को लहराने का आह्वान किया है। कुछ जगहों पर शाह के समर्थन में भी नारे लगे हैं, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि लोग राजशाही की वापसी चाहते हैं या 1979 से पहले के हालात।
ये प्रदर्शन 28 दिसंबर से शुरू हुए थे, जब ईरान की मुद्रा रियाल ऐतिहासिक गिरावट के साथ एक डॉलर के मुकाबले 14 लाख से नीचे पहुंच गई थी। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े दबावों ने पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था को और संकट में डाल दिया है।

