अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump एक बार फिर चर्चा में हैं, इस बार उनके स्वास्थ्य से जुड़ी एक रिपोर्ट को लेकर। एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप लंबे समय से खून को पतला रखने के लिए एस्पिरिन का नियमित सेवन कर रहे हैं, जिसकी मात्रा सामान्य मेडिकल गाइडलाइंस से अधिक बताई जा रही है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 79 वर्षीय डोनाल्ड ट्रंप रोज़ाना 325 मिलीग्राम एस्पिरिन लेते हैं। यह डोज़ आमतौर पर उन मरीजों को दी जाती है जिन्हें पहले हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं हो चुकी हों। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की मेडिकल टीम ने उन्हें दवा की मात्रा कम करने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने अपनी दिनचर्या में बदलाव नहीं किया।
मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ट्रंप का मानना है कि यह डोज़ उनके दिल और रक्त प्रवाह के लिए जरूरी है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि बिना स्पष्ट चिकित्सकीय जरूरत के अधिक मात्रा में एस्पिरिन का सेवन जोखिम भरा हो सकता है।
एस्पिरिन का अधिक सेवन और संभावित प्रभाव
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, एस्पिरिन का लंबे समय तक या अधिक मात्रा में सेवन केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है। कुछ शोधों में बताया गया है कि अत्यधिक डोज़ से बेचैनी, चिड़चिड़ापन, निर्णय लेने में कठिनाई और नर्वसनेस जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। बुज़ुर्गों में इसके लंबे उपयोग से डिप्रेशन और कमजोरी का खतरा भी बढ़ सकता है।
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने यह भी कहा है कि सार्वजनिक मंचों पर ट्रंप के आक्रामक बयान, अचानक रुख बदलना या असामान्य व्यवहार को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह स्वास्थ्य रिपोर्ट ध्यान खींच रही है। हालांकि, इन दोनों बातों के बीच सीधा संबंध होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
स्वास्थ्य जोखिमों पर डॉक्टरों की राय
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप पहले ‘क्रॉनिक वीनस इनसफिशिएंसी’ नामक स्थिति से पीड़ित बताए गए थे, जिसमें नसों से खून का प्रवाह प्रभावित होता है। हालांकि, व्हाइट हाउस द्वारा जारी मेडिकल बुलेटिन में उनकी हृदय संबंधी स्थिति को सामान्य बताया गया था।
डॉक्टरों का कहना है कि एस्पिरिन का एंटी-क्लॉटिंग प्रभाव आंतरिक रक्तस्राव, पेट में ब्लीडिंग या ब्रेन हेमरेज जैसे गंभीर जोखिम बढ़ा सकता है, खासकर बुज़ुर्गों में।
मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को एस्पिरिन नियमित रूप से तभी लेने की सलाह दी जाती है, जब उन्हें पहले कोई गंभीर कार्डियोवैस्कुलर समस्या रही हो। अन्य मामलों में यह दवा फायदे से ज्यादा नुकसान कर सकती है।

