Mango Farming: आम को फलों का राजा कहा जाता है, लेकिन इसकी भरपूर और गुणवत्तापूर्ण पैदावार तभी संभव है जब समय पर सही देखभाल की जाए। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, आम के पेड़ों के लिए जनवरी का महीना सबसे निर्णायक माना जाता है। इसी दौरान यह तय होता है कि पेड़ों में बौर आएंगे या सिर्फ हरी पत्तियों की बढ़वार होगी। यदि इस समय किसानों से सिंचाई, खाद या रोग प्रबंधन में थोड़ी भी चूक हो जाती है, तो पूरे सीजन की फसल प्रभावित हो सकती है और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि जनवरी में आम के पेड़ एक “संवेदनशील अवस्था” में होते हैं। इस दौरान पेड़ की आंतरिक जैविक प्रक्रिया यह निर्धारित करती है कि वह फूल-फल की ओर बढ़ेगा या केवल शाखा और पत्तियों के विकास पर ध्यान देगा। जरूरत से ज्यादा पानी, नाइट्रोजन युक्त खाद या बिना कारण रसायनों का छिड़काव करने से पेड़ फूल देने के बजाय नई पत्तियाँ निकालने लगता है। इसका सीधा असर उत्पादन और फल की गुणवत्ता पर पड़ता है।
संतुलित सिंचाई बेहद जरूरी
जनवरी में ठंड अधिक होने के कारण आम के बागों में अधिक सिंचाई नुकसानदायक साबित हो सकती है। इस समय मिट्टी को केवल हल्का नम रखना चाहिए, ज्यादा गीली नहीं। अधिक पानी देने से जड़ों में हवा का संचार बाधित होता है, जिससे बौर आने की प्रक्रिया रुक जाती है और केवल पत्तियों की बढ़वार होती है।
बौर लाने के लिए क्या करें
यदि आम के पेड़ों में बौर नहीं आ रहे हैं, तो किसान घबराएं नहीं। आवश्यकता पड़ने पर पोटेशियम नाइट्रेट (KNO₃) का सीमित और सावधानीपूर्वक उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए 1 प्रतिशत घोल (10 ग्राम प्रति लीटर पानी) तैयार कर केवल परिपक्व और स्वस्थ पेड़ों पर ही छिड़काव करें। कमजोर, छोटे या पहले से बौर वाले पेड़ों पर इसका प्रयोग न करें। विशेषज्ञों का कहना है कि यह छिड़काव हर साल जरूरी नहीं होता और जरूरत पड़ने पर एक बार ही पर्याप्त होता है।
खाद प्रबंधन में बरतें सावधानी
जनवरी में खाद का चयन बेहद सोच-समझकर करना चाहिए। इस महीने यूरिया, डीएपी या अन्य नाइट्रोजन युक्त रासायनिक खादों से बचना चाहिए, क्योंकि ये पत्तियों की बढ़वार बढ़ाती हैं, न कि फूलों की। इसके बजाय सीमित मात्रा में सड़ी हुई गोबर खाद, वर्मीकम्पोस्ट और मिट्टी को ढकने के लिए हल्की मल्चिंग अपनाई जा सकती है, जिससे मिट्टी की नमी बनी रहती है और पेड़ स्वस्थ रहता है।
रोग और कीट प्रबंधन
जनवरी में बिना जरूरत नियमित कीटनाशक छिड़काव करने से बचना चाहिए। यदि कीट दिखाई दें तो 0.5 से 1 प्रतिशत नीम ऑयल का छिड़काव सुबह या शाम के समय करें। वहीं फफूंद या रोग के लक्षण दिखने पर ही मैन्कोजेब या कार्बेंडाजिम का प्रयोग करना चाहिए।
सही देखभाल से बढ़ेगी आमदनी
यदि किसान जनवरी में आम के पेड़ों की संतुलित देखभाल करते हैं, तो गर्मियों में बड़े, रसीले और बाजार में अच्छी कीमत दिलाने वाले आमों की भरपूर पैदावार संभव है। इस महीने संयमित सिंचाई, सही खाद और सीमित दवाओं के इस्तेमाल से आम की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बन सकती है।

