Iran Protests: ईरान में प्रदर्शनों पर सख्ती: सरकार का 72 घंटे में सरेंडर का अल्टीमेटम

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Iran Protests: ईरान में दिसंबर के अंत से जारी व्यापक जनप्रदर्शनों के बीच सरकार ने अब सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और राष्ट्रीय मुद्रा के तेज़ अवमूल्यन के खिलाफ शुरू हुए ये प्रदर्शन धीरे-धीरे राजनीतिक असंतोष में बदल गए हैं। हालात को नियंत्रित करने के लिए ईरानी प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

ईरान के पुलिस प्रमुख अहमद-रेजा रादान ने सरकारी टेलीविजन पर बयान जारी करते हुए प्रदर्शन में शामिल लोगों को 72 घंटे के भीतर आत्मसमर्पण करने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि जो युवा “भ्रम या गलतफहमी” में आकर प्रदर्शनों में शामिल हुए हैं, अगर वे तय समय सीमा के भीतर सरेंडर करते हैं तो उनके साथ नरमी बरती जा सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग तय समय के भीतर आत्मसमर्पण नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का कहना है कि शुरुआत में ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे, लेकिन बाद में इनमें हिंसा शामिल हो गई। अधिकारियों का आरोप है कि इन प्रदर्शनों को भड़काने में अमेरिका और इजरायल जैसे ईरान-विरोधी देशों की भूमिका रही है। सरकार के अनुसार, बाहरी ताकतें देश की आंतरिक स्थिरता को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।

प्रदर्शन बढ़ने के साथ ही सरकार ने संचार सेवाओं पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए। कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं और अंतरराष्ट्रीय कॉल्स पर रोक लगा दी गई, जिससे देश के भीतर हो रही घटनाओं की जानकारी बाहर तक सीमित रूप से ही पहुंच सकी। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी कहा है कि इंटरनेट सेवाओं को धीरे-धीरे बहाल किया जाएगा, ताकि सामान्य जनजीवन प्रभावित न हो।

सोमवार को कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के प्रमुखों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि सरकार देश में व्याप्त आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए दिन-रात काम कर रही है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ और न्यायपालिका प्रमुख घोलामहुसैन मोहसिनी एजई ने स्पष्ट किया कि हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, जबकि आम जनता की समस्याओं को हल करने के प्रयास तेज किए जाएंगे।

ईरान में इन प्रदर्शनों को हाल के वर्षों में सरकार के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना जा रहा है। जहां एक ओर सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार संगठनों ने हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि ईरान मौत की सजा को डराने के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, चीन के बाद ईरान दुनिया में सबसे ज्यादा फांसी देने वाला देश है। पिछले साल ईरान में करीब 1,500 लोगों को मौत की सजा दी गई थी।

ईरान ह्यूमन राइट्स नामक गैर-सरकारी संगठन का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 3,428 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। वहीं, सरकार ने लगभग 3,000 लोगों की गिरफ्तारी की बात कही है, लेकिन मानवाधिकार समूहों का कहना है कि यह संख्या 20,000 तक पहुंच सकती है।

फिलहाल ईरान में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। सरकार जहां सख्ती और चेतावनी के जरिए नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रही है, वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि 72 घंटे का यह अल्टीमेटम हालात को शांत करेगा या असंतोष को और बढ़ाएगा।