मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच Iran ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए नई नियुक्ति की है। देश ने Mohammad-Bagher को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) का नया सचिव नियुक्त किया है। उन्होंने अली लारिजानी की जगह ली है, जिनकी हाल ही में एक हमले में मौत हो गई थी। इस घटनाक्रम को ईरान की सुरक्षा रणनीति में बड़ा और अहम बदलाव माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब देश युद्ध जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि रणनीतिक संकेत भी है। ईरान इस वक्त लगातार बाहरी हमलों और आंतरिक दबावों से जूझ रहा है, ऐसे में सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना उसकी प्राथमिकता बन गई है। मोहम्मद बाघेर को एक सख्त और अनुभवी सुरक्षा अधिकारी के रूप में देखा जाता है, जिनकी नियुक्ति से यह संकेत मिलता है कि ईरान आने वाले समय में अपने सुरक्षा ढांचे को और आक्रामक तरीके से संभाल सकता है।
इसी बीच, वैश्विक स्तर पर भी हालात तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर प्रस्तावित हमलों को पांच दिनों के लिए टालने का फैसला लिया है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और इससे तनाव कम होने की संभावना है। हालांकि, Israel ने इस दावे पर संदेह जताया है और इसे एक रणनीतिक चाल बताया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष अपने चरम पर है और पूरी दुनिया ऊर्जा संकट की आशंका से जूझ रही है। खासकर Persian Gulf और Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तनाव बढ़ने से तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
इस पूरे संकट पर भारत भी लगातार नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में बयान देते हुए कहा कि देश के पास फिलहाल पर्याप्त तेल और गैस का भंडार है और सप्लाई को बनाए रखने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह का टैक्स लगाने की खबरें पूरी तरह गलत हैं। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार वहां फ्री नेविगेशन यानी आवागमन की स्वतंत्रता लागू है।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार सतर्क नजर आ रही है। मिडिल ईस्ट के कई देशों, खासकर इजरायल और खाड़ी क्षेत्रों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें Jordan और Saudi Arabia के रास्ते शामिल हैं, ताकि नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
इस बीच एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है, जिसके अनुसार फारस की खाड़ी में अभी भी करीब 20 भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिनमें लगभग 540 भारतीय नाविक सवार हैं। यह स्थिति भारत सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, और इन सभी को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, ईरान में हुआ यह नेतृत्व परिवर्तन, अमेरिका का बदला रुख और भारत की सतर्कता – ये सभी संकेत दे रहे हैं कि मिडिल ईस्ट का मौजूदा संकट अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या बातचीत के जरिए तनाव कम होता है या फिर हालात और बिगड़ते हैं।

