फरीदाबाद में पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार, पेट्रोल पंप से चला रहा था नेटवर्क

Pakistani Spy
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हरियाणा के Faridabad से एक Pakistani Spy बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। Ghaziabad पुलिस ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले गैंग के सदस्य नौशाद अली उर्फ लालू को गिरफ्तार किया है। आरोपी पिछले कुछ महीनों से एक पेट्रोल पंप पर पंचर बनाने की दुकान चला रहा था, लेकिन असल में वह देश की संवेदनशील जानकारी दुश्मन देश तक पहुंचा रहा था।

पुलिस के अनुसार, नौशाद अली करीब तीन महीने पहले गांव नचौली स्थित एक पेट्रोल पंप पर काम करने लगा था। वह खुद को एक साधारण मजदूर के रूप में पेश करता था, ताकि किसी को उस पर शक न हो। लेकिन जांच में सामने आया कि वह एक संगठित जासूसी नेटवर्क का हिस्सा था, जो रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों की गतिविधियों की जानकारी पाकिस्तान तक भेज रहा था।

इस मामले में अब तक गैंग के सरगना सुहेल सहित 22 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सुहेल, जो मेरठ का रहने वाला है, इस पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था। पुलिस ने नौशाद के अलावा मथुरा जिले के एक अन्य आरोपी और एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया है। पूछताछ में सभी ने कबूल किया कि उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए इस नेटवर्क में जोड़ा गया था।

धवल जायसवाल, जो इस केस की जांच कर रहे हैं, ने बताया कि आरोपी रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों की फोटो और वीडियो बनाकर व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से पाकिस्तान भेजते थे। इसके बदले उन्हें प्रति फोटो 4 से 6 हजार रुपये तक मिलते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि इस गैंग का नेटवर्क काफी बड़ा था और ये लोग देशभर में करीब 50 सोलर कैमरे लगाने की योजना पर काम कर रहे थे। कुछ जगहों पर ये कैमरे लगाए भी जा चुके थे, जिनमें दिल्ली और हरियाणा के रेलवे स्टेशन शामिल हैं। इन कैमरों की खास बात यह थी कि उनका एक्सेस सीधे पाकिस्तान में मौजूद हैंडलर्स के पास था, जिससे वे भारत के संवेदनशील इलाकों की लाइव निगरानी कर सकते थे।

पुलिस ने दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन और हरियाणा के Sonipat के पास लगाए गए कैमरों को बरामद कर लिया है। इन डिवाइस को अब फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके जरिए कितनी जानकारी लीक हुई।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क ने अब तक 450 से ज्यादा फोटो और वीडियो पाकिस्तान भेजे हैं। आरोपी न सिर्फ रिकॉर्डिंग करते थे, बल्कि लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग भी करते थे, जिससे वहां बैठे लोग रियल टाइम में जानकारी हासिल कर सकें। हर कैमरे की इंस्टॉलेशन के लिए आरोपियों को 10 से 15 हजार रुपये तक दिए जाते थे।

इस केस में एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि नौशाद को इस काम में लगाने के पीछे पेट्रोल पंप के एक पूर्व मैनेजर का हाथ था। जांच में पता चला कि उसने ही नौशाद को यहां काम दिलवाया था। इसके बाद धीरे-धीरे यह पूरा नेटवर्क सक्रिय हो गया।

गिरफ्तारी की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। 16 मार्च को पुलिस सादे कपड़ों में पेट्रोल पंप पर पहुंची और वहां काम कर रहे कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की। शुरुआत में नौशाद पर किसी का ध्यान नहीं गया, लेकिन जब उसका नाम सामने आया तो पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया और उसका मोबाइल जब्त कर लिया। मोबाइल से मिले डेटा ने पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया।

इस मामले में Uttar Pradesh Police, Delhi Police और हरियाणा पुलिस के साथ-साथ एटीएस भी संयुक्त रूप से जांच कर रही हैं। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसमें और कौन-कौन शामिल है।

फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले को देश की सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर मामला मान रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि जांच अभी जारी है।