US-Iran tension: मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब कूटनीतिक हल की उम्मीदें तेज होती नजर आ रही हैं। भारत के पूर्व राजनयिक अशोक सज्जनहर ने हालिया घटनाक्रमों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनके मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की स्थिति अब बातचीत की दिशा में मुड़ सकती है, और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बदला हुआ रुख है।
सज्जनहर का मानना है कि जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ अपना सैन्य अभियान शुरू किया था, तब उन्होंने कुछ स्पष्ट रणनीतिक लक्ष्य तय किए थे। हालांकि, ये लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो सके। इसी वजह से अब अमेरिका अपनी नीति में बदलाव करता दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि यह बदलाव केवल रणनीतिक नहीं बल्कि परिस्थितियों से मजबूर होकर लिया गया कदम भी हो सकता है।
दरअसल, अमेरिका इस समय कई तरह के दबावों का सामना कर रहा है। एक ओर जहां देश के भीतर महंगाई लगातार बढ़ रही है, वहीं तेल की कीमतों में उछाल ने आम जनता की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। इसके अलावा, युद्ध के खिलाफ देश में विरोध प्रदर्शन भी तेज हो रहे हैं। इन घरेलू कारणों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अमेरिका पर तनाव कम करने का दबाव बढ़ रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रंप का हालिया फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। उन्होंने ईरान के पावर प्लांट्स पर प्रस्तावित हमलों को पांच दिनों के लिए टाल दिया है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच “अच्छी और सकारात्मक बातचीत” जारी है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच संघर्ष चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
पहले जहां ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि अगर उसने Strait of Hormuz को नहीं खोला, तो अमेरिका सख्त कार्रवाई करेगा, वहीं अब उनका रुख नरम पड़ता दिख रहा है। ईरान ने भी पहले पलटवार की धमकी दी थी, जिसमें पूरे क्षेत्र के तेल और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने की बात कही गई थी। इन धमकियों के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे, लेकिन अब बातचीत की पहल से उम्मीद जगी है कि स्थिति काबू में आ सकती है।
“Likely a sign of de-escalation”: Former diplomat Ashok Sajjanhar on Trump’s latest statement on Iran
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— ANI Digital (@ani_digital) March 24, 2026
अशोक सज्जनहर ने इस मुद्दे पर पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने साफ कहा कि Pakistan इस मामले में एक भरोसेमंद मध्यस्थ साबित नहीं हो सकता। उनके अनुसार, पारंपरिक और अधिक विश्वसनीय मध्यस्थ जैसे Oman और Qatar इस स्थिति को संभालने में ज्यादा प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह यू-टर्न केवल एक सामरिक चाल नहीं बल्कि बदलते वैश्विक और घरेलू समीकरणों का परिणाम है। अमेरिका में आने वाले चुनाव भी इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। चुनावी माहौल में सरकार किसी बड़े युद्ध के जोखिम से बचना चाहती है, क्योंकि इसका सीधा असर जनता और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच अब टकराव की बजाय बातचीत को प्राथमिकता दी जा रही है। अगर यह कूटनीतिक प्रक्रिया इसी तरह आगे बढ़ती है, तो आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक स्तर पर भी राहत देखने को मिल सकती है।

