रामनवमी पर अयोध्या जाएंगे दिग्विजय सिंह, रामलला के करेंगे दर्शन

Digvijay Singh
Digvijay Singh

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Digvijay Singh एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका आगामी अयोध्या दौरा है, जो धार्मिक के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम माना जा रहा है। रामनवमी के पावन अवसर पर वे Ayodhya पहुंचकर भगवान रामलला के दर्शन करेंगे। खास बात यह है कि राम मंदिर अयोध्या के निर्माण के बाद यह उनका पहला दौरा होगा।

मिली जानकारी के अनुसार, दिग्विजय सिंह 26 मार्च की सुबह Air India की फ्लाइट से दिल्ली से रवाना होंगे और करीब 9:40 बजे अयोध्या एयरपोर्ट पहुंचेंगे। वहां पहुंचने के बाद उनका कार्यक्रम काफी व्यस्त रहेगा। सबसे पहले वे हनुमानगढ़ी में दर्शन करेंगे, जिसके बाद राम मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके अलावा, वे कनक भवन भी जाएंगे।

यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राम मंदिर के शिलान्यास और निर्माण के बाद दिग्विजय सिंह पहली बार रामलला के दर्शन करने जा रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2021 में उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए 1,11,111 रुपये का दान भी दिया था। यह राशि उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नाम चेक के माध्यम से भेजी थी। उस समय उन्होंने यह भी कहा था कि मंदिर के पूर्ण रूप से तैयार होने के बाद वे स्वयं अयोध्या जाकर पूजा करेंगे।

हालांकि, इस यात्रा को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। रामेश्वर शर्मा ने दिग्विजय सिंह के इस दौरे पर तंज कसते हुए कहा कि जब राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में कांग्रेस नेताओं को निमंत्रण मिला था, तब वे शामिल नहीं हुए। अब बदलते राजनीतिक हालात को देखते हुए यह यात्रा की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी अयोध्या यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह से अनुरोध करेंगे कि वे 1992 में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करें।

रामेश्वर शर्मा ने आगे कहा कि यदि देश के राजनीतिक नेतृत्व ने पहले ही राम मंदिर के महत्व को समझ लिया होता, तो यह मंदिर कई साल पहले बन चुका होता। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस रामलला को कभी काल्पनिक बताया गया था, आज उसी की पूजा की जा रही है, ऐसे में इस सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए।

इस पर कांग्रेस की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। पार्टी प्रवक्ता जितेंद्र मिश्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह ने भी राम मंदिर के निर्माण में योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि “दिग्विजय सिंह आपसे बड़े सनातनी हैं, पहले आप यह बताएं कि आपने क्या किया है।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिग्विजय सिंह का यह दौरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक संदेश भी छिपा हो सकता है। आगामी चुनावों और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इस यात्रा को कांग्रेस की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

रामनवमी जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर अयोध्या जाना निश्चित रूप से एक बड़ा प्रतीकात्मक कदम है। इससे न केवल धार्मिक भावनाओं को बल मिलता है, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक टकराव भी सामने आता है।

कुल मिलाकर, दिग्विजय सिंह का यह अयोध्या दौरा आने वाले दिनों में सियासी बहस को और तेज कर सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस धार्मिक यात्रा का राजनीतिक असर किस तरह सामने आता है।