Middle East War: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच Iran ने शांति स्थापित करने में India की संभावित भूमिका को लेकर अहम टिप्पणी की है। ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत स्थित प्रतिनिधि Dr. Abdul Majid Hakeem Ilahi ने कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi में वैश्विक नेताओं को साथ लाकर युद्ध को रोकने की क्षमता है। उनका मानना है कि भारत जैसे प्रभावशाली देश को कूटनीतिक पहल करते हुए संघर्ष को खत्म करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि Strait of Hormuz के रास्ते तेल और गैस की सप्लाई जारी रखने की कोशिश की जाएगी। हालांकि उन्होंने जोर दिया कि असली समाधान युद्ध को समाप्त करने में है, ताकि क्षेत्र में स्थिरता और शांति बहाल हो सके।
भारत की भूमिका पर ईरान की उम्मीद
डॉ. इलाही ने कहा कि भारत के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत कूटनीतिक संबंध हैं और इसी वजह से वह शांति वार्ता में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को अन्य वैश्विक नेताओं के साथ मिलकर शांति पहल करनी चाहिए।
उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के कई प्रभावशाली नेताओं के साथ अच्छे संबंध रखते हैं, जिनमें अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu भी शामिल हैं। इलाही का मानना है कि अगर भारत इन नेताओं के साथ मिलकर बातचीत करे तो युद्ध रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि वैश्विक नेताओं को एकजुट होकर अमेरिका जाना चाहिए और वहां राष्ट्रपति ट्रंप को यह समझाना चाहिए कि युद्ध निर्दोष नागरिकों के लिए विनाशकारी साबित होता है और इसे जल्द से जल्द रोका जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए इजरायल पर भी दबाव बनाया जाना चाहिए।
PM Modi is most likely to Mediate for a peace deal!
On Iran allowing Indian ships to sail freely and bring energy products from the Strait of Hormuz, Representative of Iran’s Supreme Leader in India, Dr Abdul Majid Hakeem Ilahi, says: “Actually, there have been some discussions… pic.twitter.com/i8k4iOXikV
— Major Sammer Pal Toorr (Infantry Combat Veteran) (@samartoor3086) March 13, 2026
“ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया”
अपने बयान में ईरानी प्रतिनिधि ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान ने इस संघर्ष की शुरुआत नहीं की है। उन्होंने कहा कि उनका देश अपनी गरिमा और संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।
इलाही के शब्दों में, ईरान ने इस युद्ध को शुरू नहीं किया, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो देश अपनी भूमि की रक्षा के लिए हर बलिदान देने को तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में सैन्य तनाव तेजी से बढ़ रहा है और कई देशों के बीच टकराव की आशंका बनी हुई है।
ऊर्जा आपूर्ति और होर्मुज का महत्व
मध्य-पूर्व के इस संकट का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व से आयात करता है। इसलिए इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा और स्थिरता भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ईरानी प्रतिनिधि ने भरोसा दिलाया कि भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की जाएगी।
कूटनीतिक समाधान की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान संकट का समाधान सैन्य कार्रवाई से ज्यादा कूटनीतिक बातचीत के जरिए संभव है। भारत के ईरान, अमेरिका और इजरायल तीनों के साथ संबंध होने के कारण नई दिल्ली संभावित रूप से संवाद और मध्यस्थता में भूमिका निभा सकता है।
हालांकि इस विषय पर अभी तक भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मानते हैं कि यदि वैश्विक शक्तियां मिलकर बातचीत का रास्ता अपनाएं तो क्षेत्र में शांति बहाल करने की संभावना बढ़ सकती है।
वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में भारत की अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक भूमिका लगातार मजबूत हुई है। विभिन्न वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी और कई देशों के साथ संतुलित संबंधों ने उसे एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में स्थापित किया है।
इसी वजह से कुछ अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक मानते हैं कि यदि भविष्य में शांति वार्ता की प्रक्रिया शुरू होती है, तो भारत इसमें सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ईरान की ओर से आया यह बयान इस बात का संकेत देता है कि क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियां अब कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर भी विचार कर रही हैं।

