भारत का पाकिस्तान को बड़ा संदेश: आतंकवाद बंद होने तक बहाल नहीं होगी सिंधु जल संधि

Indus Waters Treaty
Indus Waters Treaty

India ने एक बार फिर Pakistan को साफ और कड़ा संदेश दिया है कि जब तक वह सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और भरोसेमंद तरीके से बंद नहीं करता, तब तक Indus Waters Treaty यानी सिंधु जल संधि बहाल नहीं की जाएगी। भारत सरकार ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता और आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति पहले से अधिक सख्त है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को “राज्य नीति” की तरह इस्तेमाल करता आया है और भारत को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का पूरा अधिकार है।

जायसवाल ने पिछले वर्ष हुए Pahalgam terror attack का जिक्र करते हुए कहा कि पूरी दुनिया ने उस आतंकी हमले की भयावहता देखी थी, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। भारत ने उस हमले के बाद आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान समर्थित आतंकी ढांचे को निशाना बनाया था।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “सिंधु जल संधि पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के जवाब में स्थगित रखी गई है। पाकिस्तान को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय तरीके से आतंकवाद का समर्थन बंद करना होगा।”

1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई सिंधु जल संधि दोनों देशों के बीच नदी जल बंटवारे का आधार रही है। इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की विभिन्न नदियों के जल उपयोग को लेकर नियम तय किए गए थे। दशकों तक कई तनावों के बावजूद यह संधि जारी रही, लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इसे स्थगित करने का फैसला लिया, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में बड़ा रणनीतिक बदलाव माना गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, एक साल बाद भी भारत ने जम्मू-कश्मीर में स्थित Baglihar Dam के गेट बंद रखे हुए हैं। यह बांध चिनाब नदी पर बना है और सिंधु जल संधि से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिर्फ जल प्रबंधन का मुद्दा नहीं है, बल्कि पाकिस्तान को एक स्पष्ट राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।

इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ‘Operation Sindoor’ की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सशस्त्र बलों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अभियान आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के संकल्प का प्रतीक था।

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सेना की सटीकता, पेशेवर क्षमता और मजबूत इच्छाशक्ति को दुनिया के सामने दिखाया। यह अभियान पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाने के लिए शुरू किया गया था।

भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी आतंकवाद के मुद्दे को उठाता रहा है। सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों के खिलाफ ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं करता, तब तक सामान्य संबंध बहाल करना संभव नहीं होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखना भारत की नई रणनीतिक नीति का हिस्सा है, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कदम सिर्फ सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक और कूटनीतिक दबाव भी शामिल हैं।

भारत का यह रुख साफ संकेत देता है कि अब आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की नरमी की संभावना बेहद कम है। आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्ते काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेंगे कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कितना ठोस और विश्वसनीय कदम उठाता है।