भारत-इजराइल 1.1 अरब डॉलर Defence deal: भारतीय वायुसेना को मिलेंगे नए एयर टैंकर

Defence deal
Defence deal

Defence deal: Narendra Modi के नेतृत्व में भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। भारत ने इजरायल की रक्षा कंपनी Israel Aerospace Industries (IAI) और Hindustan Aeronautics Limited (HAL) के साथ लगभग 1.1 अरब डॉलर की बड़ी रक्षा डील की है। इस समझौते को भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय माना जा रहा है।

इस मेगा डील के तहत छह Boeing 767 विमानों को आधुनिक एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर में बदला जाएगा। इन टैंकर विमानों के जरिए भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान हवा में ही ईंधन भर सकेंगे, जिससे उनकी ऑपरेशनल क्षमता और मारक दूरी में बड़ा इजाफा होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता सिर्फ नए सैन्य उपकरण खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री मोदी की “मेक इन इंडिया” और रक्षा आत्मनिर्भरता नीति को भी मजबूती देता है। इस प्रोजेक्ट में भारतीय कंपनियों और इंजीनियरों की बड़ी भागीदारी होगी, जिससे देश में रक्षा तकनीक और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

इजरायली कंपनी IAI पिछले कई वर्षों से भारत के साथ रक्षा क्षेत्र में काम कर रही है। मार्च 2024 में कंपनी ने नई दिल्ली में अपनी भारतीय शाखा Aerospace Services India (ASI) की शुरुआत की थी। यह शाखा भारत की सरकारी रक्षा अनुसंधान एजेंसी Defence Research and Development Organisation यानी DRDO के साथ मिलकर कई रक्षा प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार ASI में लगभग 97 प्रतिशत कर्मचारी भारतीय हैं, जो इस साझेदारी को स्थानीय स्तर पर मजबूत बनाता है। भारत और इजरायल पहले भी मिसाइल सिस्टम, ड्रोन तकनीक और एयर डिफेंस प्रोजेक्ट्स पर साथ काम कर चुके हैं।

IAI और DRDO मिलकर Medium Range Surface-to-Air Missile यानी MRSAM सिस्टम भी विकसित कर चुके हैं। यह अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें आधुनिक रडार, मोबाइल लॉन्चर, इंटरसेप्टर मिसाइलें और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि Boeing 767 विमानों को टैंकर में बदलने का फैसला आर्थिक रूप से भी काफी फायदेमंद है। नए टैंकर विमान खरीदने की तुलना में कन्वर्जन प्रक्रिया लगभग 20 प्रतिशत तक सस्ती पड़ती है। इसके अलावा अपग्रेड किए गए विमानों का इस्तेमाल कई दशकों तक किया जा सकता है।

इन टैंकर विमानों के शामिल होने से भारतीय वायुसेना को कई बड़े रणनीतिक फायदे मिलेंगे। लड़ाकू विमान अब लंबी दूरी तक बिना जमीन पर उतरे मिशन पूरा कर सकेंगे। इससे युद्ध के समय तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता मजबूत होगी और हिंद महासागर से लेकर पश्चिम एशिया तक भारत की रणनीतिक पहुंच बढ़ेगी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि आधुनिक युद्ध में एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इससे लड़ाकू विमानों की रेंज और मिशन समय दोनों बढ़ जाते हैं। यह तकनीक लंबी दूरी के ऑपरेशन और सीमा सुरक्षा के लिए बेहद अहम मानी जाती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इन टैंकर विमानों की डिलीवरी 2030 से शुरू हो सकती है। HAL और IAI पहले से कई ड्रोन और मिसाइल प्रोजेक्ट्स पर भी साथ काम कर रहे हैं। इसलिए यह समझौता भविष्य में और बड़े रक्षा सहयोग का रास्ता खोल सकता है।

भारत और इजरायल के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश साइबर सुरक्षा, मिसाइल तकनीक, ड्रोन सिस्टम और एयर डिफेंस जैसे क्षेत्रों में तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं। इस नई डील को भी उसी रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।