India Canada Uranium Deal: मध्य-पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच दक्षिण एशिया में भी एक नई कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। भारत और कनाडा के बीच हाल ही में हुए यूरेनियम आपूर्ति समझौते ने क्षेत्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। इस समझौते के बाद पाकिस्तान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को परमाणु सहयोग के क्षेत्र में विशेष सुविधाएं मिल रही हैं, जो क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं।
भारत-कनाडा के बीच अहम परमाणु समझौता
हाल के दिनों में India और Canada के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। इनमें परमाणु ऊर्जा के लिए दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति का करार सबसे ज्यादा चर्चा में है। इस समझौते के तहत कनाडा भारत को परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए आवश्यक यूरेनियम उपलब्ध कराएगा।
इस डील का उद्देश्य भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के विकल्पों को मजबूत करना है। भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ ऊर्जा मांग में लगातार वृद्धि का सामना कर रहा है, इसलिए परमाणु ऊर्जा को एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस समझौते को नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
नई परमाणु तकनीकों पर भी सहयोग
इस समझौते का दायरा केवल यूरेनियम आपूर्ति तक सीमित नहीं है। इसके तहत दोनों देश उन्नत परमाणु तकनीकों के विकास में भी सहयोग करेंगे। खास तौर पर छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और आधुनिक परमाणु रिएक्टर तकनीक पर संयुक्त शोध और विकास की योजना बनाई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीक बन सकते हैं। यह पारंपरिक बड़े परमाणु संयंत्रों की तुलना में कम लागत और अधिक सुरक्षा के साथ बिजली उत्पादन की क्षमता रखते हैं।
भारत के लिए यह सहयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि देश अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा को भी दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
पाकिस्तान की चिंता
इस समझौते के बाद Pakistan ने आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए चिंता जताई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि नागरिक परमाणु सहयोग के क्षेत्र में किसी एक देश को दी गई विशेष छूट क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
इस्लामाबाद का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस तरह के समझौतों के दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार करना चाहिए। पाकिस्तान का मानना है कि दक्षिण एशिया में पहले से मौजूद सुरक्षा चुनौतियों के बीच इस तरह के कदम नई रणनीतिक बहस को जन्म दे सकते हैं।
पुराने परमाणु परीक्षण का जिक्र
पाकिस्तान ने अपने बयान में 1974 में भारत द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण का भी उल्लेख किया। उसी घटना के बाद वैश्विक स्तर पर परमाणु सामग्री और तकनीक के निर्यात को नियंत्रित करने के लिए Nuclear Suppliers Group का गठन किया गया था।
पाकिस्तानी पक्ष का कहना है कि जिस घटना के बाद यह व्यवस्था बनी, उसी देश को अब अलग तरह की छूट मिलना अंतरराष्ट्रीय परमाणु व्यवस्था के लिए सवाल खड़े करता है।
परमाणु निगरानी पर भी सवाल
पाकिस्तान ने यह भी कहा कि भारत के सभी नागरिक परमाणु प्रतिष्ठान अंतरराष्ट्रीय निगरानी में नहीं हैं। इस संदर्भ में उसने International Atomic Energy Agency की भूमिका का उल्लेख करते हुए पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया।
हालांकि भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम जिम्मेदार और सुरक्षित मानकों के अनुरूप है। भारत का कहना है कि उसका नागरिक परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा उत्पादन, तकनीकी विकास और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
दक्षिण एशिया की रणनीति पर संभावित असर
विश्लेषकों का मानना है कि भारत को विदेशों से यूरेनियम की नियमित आपूर्ति मिलने से देश की ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी और घरेलू संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। वहीं पाकिस्तान का मानना है कि इससे क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
फिलहाल यह समझौता ऊर्जा सहयोग के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसके राजनीतिक और रणनीतिक प्रभावों पर दक्षिण एशिया और वैश्विक स्तर पर चर्चा जारी है।

