AI Jobs Impact: कृत्रिम मेधा यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते उपयोग को लेकर लंबे समय से यह आशंका जताई जा रही थी कि इससे बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म हो सकती हैं। हालांकि एक नई रिपोर्ट के अनुसार अभी तक AI के कारण रोजगार में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन युवा कर्मचारियों की भर्ती की रफ्तार जरूर धीमी होती दिखाई दे रही है।
AI कंपनी Anthropic द्वारा जारी एक हालिया अध्ययन में श्रम बाजार के आंकड़ों और वास्तविक दुनिया में AI के इस्तेमाल का विस्तृत विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान समय में AI का वास्तविक उपयोग उसकी संभावित क्षमता की तुलना में अभी भी काफी सीमित है। यानी तकनीक तेजी से विकसित हो रही है, लेकिन उसका व्यापक प्रभाव अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि AI का सबसे ज्यादा प्रभाव उन नौकरियों पर देखा जा रहा है जो कार्यालय आधारित और ज्ञान-आधारित कार्यों से जुड़ी हैं। विशेष रूप से कोडिंग, सूचना प्रसंस्करण, डेटा विश्लेषण और नियमित डिजिटल कार्यों से जुड़े पदों में बदलाव दिखाई देने लगा है।
अध्ययन के अनुसार कुछ पेशे ऐसे हैं जिनमें AI पहले से ही कई कार्यों को तेज या स्वचालित करने लगा है। इनमें कंप्यूटर प्रोग्रामर, ग्राहक सेवा प्रतिनिधि, डेटा एंट्री ऑपरेटर, बाजार अनुसंधान विश्लेषक और वित्तीय या निवेश विश्लेषक जैसे पद शामिल हैं। इन क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के कई कार्य अब बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models) की मदद से कम समय में किए जा सकते हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि इन नौकरियों की तुरंत जरूरत खत्म हो जाएगी। बल्कि AI इन पेशों में काम करने के तरीके को बदल रहा है। कर्मचारियों को अब नई तकनीकों के साथ काम करने की क्षमता विकसित करनी होगी ताकि वे बदलते कार्य वातावरण के साथ खुद को ढाल सकें।
रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है कि कंपनियां अभी बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को हटाने की बजाय नई भर्ती को थोड़ा धीमा कर रही हैं। खासकर एंट्री-लेवल यानी शुरुआती स्तर की नौकरियों में भर्ती की गति कम होती दिख रही है। इससे युवा और नए स्नातकों के लिए नौकरी पाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इसके विपरीत, ऐसे पेशे जिनमें मुख्य रूप से शारीरिक क्षमता या प्रत्यक्ष मानवीय कौशल की जरूरत होती है, उन पर AI का प्रभाव अभी बहुत कम दिखाई दे रहा है। उदाहरण के तौर पर रसोइया, मोटरसाइकिल मैकेनिक, लाइफगार्ड और बारटेंडर जैसे पेशों में तकनीक का हस्तक्षेप सीमित है। इन क्षेत्रों में मानव कौशल और अनुभव अभी भी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि AI अभी अपनी सैद्धांतिक क्षमता से काफी दूर है। वर्तमान में इसका वास्तविक उपयोग उसकी संभावित क्षमता का केवल एक छोटा सा हिस्सा है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में जब AI तकनीक और विकसित होगी, तब इसका प्रभाव रोजगार बाजार पर और स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में AI पूरी तरह नौकरियां खत्म करने के बजाय काम करने के तरीके को बदल देगा। कई नए प्रकार के रोजगार भी पैदा हो सकते हैं, जिनमें AI प्रबंधन, डेटा निगरानी और तकनीकी प्रशिक्षण जैसी भूमिकाएं शामिल होंगी।
इसलिए नौकरी बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती तकनीक के साथ तालमेल बैठाने की होगी। कर्मचारियों और छात्रों को नई डिजिटल स्किल्स सीखनी होंगी ताकि वे AI के दौर में भी प्रतिस्पर्धी बने रह सकें।

