इंटरनेशनल डेस्क: पाकिस्तान अगले महीने सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी के 556वें प्रकाश पर्व को भव्य तरीके से मनाने की तैयारियों में जुटा हुआ है। इस मौके पर भारत सहित दुनिया भर से हजारों सिख श्रद्धालु पाकिस्तान पहुंचेंगे, जिनके स्वागत और सुरक्षा के लिए सरकार ने व्यापक इंतजाम किए हैं।
मंगलवार को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गृह विभाग में तैयारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें पंजाब सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और धार्मिक संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक की अध्यक्षता पंजाब के पहले सिख मंत्री और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (PSGPC) के प्रमुख सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने की।
इस बैठक में इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) के अध्यक्ष साजिद महमूद चौहान, पंजाब के गृह सचिव अहमद जावेद काजी, और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे।
सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष ध्यान
बैठक के बाद ETPB के प्रवक्ता गुलाम मोहिउद्दीन ने बताया कि पाकिस्तान सरकार ने तीर्थयात्रियों के लिए पूर्ण सुरक्षा, चिकित्सा सुविधाएं, परिवहन और गुणवत्तापूर्ण आवास की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि सभी प्रमुख गुरुद्वारों, विशेषकर गुरुद्वारा जन्मस्थान, ननकाना साहिब में बिजली और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
गुरुद्वारों के आसपास सफाई, सजावट और प्रकाश व्यवस्था के विशेष निर्देश जारी किए गए हैं।
पाकिस्तान सरकार का लक्ष्य है कि सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण में धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिले।
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मुख्य आयोजन ननकाना साहिब में
गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व 4 नवंबर से 14 नवंबर तक मनाया जाएगा।
मुख्य समारोह 5 नवंबर को लाहौर से लगभग 80 किलोमीटर दूर ननकाना साहिब स्थित गुरुद्वारा जन्मस्थान में आयोजित होगा।
इस पवित्र अवसर पर भारत सहित ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कई देशों से हजारों सिख श्रद्धालु पहुंचेंगे।
भारत और पाकिस्तान के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत करीब 3,000 भारतीय श्रद्धालु इस आयोजन में हिस्सा लेंगे।
हालांकि, पिछले कुछ महीनों से यात्रा पर प्रतिबंध के कारण कोई भी भारतीय तीर्थयात्री पाकिस्तान नहीं जा सका था।
अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और मई में सीमा तनाव के बाद से दोनों देशों के बीच आवागमन सीमित हो गया था।
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वाघा बॉर्डर पर अतिरिक्त काउंटर
बैठक में सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने फेडरल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) को निर्देश दिया कि वाघा सीमा पर अतिरिक्त इमिग्रेशन काउंटर स्थापित किए जाएं, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की प्रक्रिया आसानी से पूरी की जा सके।
उन्होंने कहा कि “श्रद्धालुओं को सम्मान और सुविधा के साथ प्रवेश मिलना चाहिए। इमिग्रेशन प्रक्रिया तेज़ और पारदर्शी होनी चाहिए।”
अरोड़ा ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी गुरुद्वारों के आसपास सिख धर्म में निषिद्ध वस्तुओं की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
इसके अलावा, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा कर्मियों और स्वयंसेवकों को प्रमुख गुरुद्वारों पर तैनात किया जाएगा।
श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारी
ETPB के अध्यक्ष साजिद महमूद चौहान ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव के बावजूद, पाकिस्तान सरकार सिख श्रद्धालुओं का सम्मान, प्रेम और आतिथ्य के साथ स्वागत करेगी।
उन्होंने कहा कि “धार्मिक मेहमान हमारे लिए सम्मान का विषय हैं, और पाकिस्तान उनकी सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।”
चौहान ने यह भी प्रस्ताव दिया कि पाकिस्तानी सिख डॉक्टर प्रकाश पर्व के दौरान स्वेच्छा से चिकित्सा सेवाएं प्रदान करें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तीर्थयात्रियों को तुरंत सहायता मिल सके।
सरकार ने सभी स्थानीय अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों को अलर्ट पर रखा है और ननकाना साहिब, पंजा साहिब, और लाहौर के डेरा साहिब गुरुद्वारों के पास मेडिकल कैम्प लगाने की योजना बनाई है।
आस्था और एकता का प्रतीक
ननकाना साहिब सिख समुदाय के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है, क्योंकि यह गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान है।
हर साल यहां देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचकर अरदास, कीर्तन और लंगर में हिस्सा लेते हैं।
इस बार भी आयोजन में धार्मिक जुलूस, विशेष कीर्तन, सत्संग और सामूहिक लंगर का आयोजन होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे।
धार्मिक सौहार्द का संदेश
पंजाब सरकार ने कहा है कि गुरु नानक प्रकाश पर्व जैसे आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक सद्भाव को भी मजबूत करते हैं।
यह त्योहार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति, प्रेम और भाईचारे का संदेश देने का माध्यम बनेगा।
पाकिस्तान का दावा है कि इन तैयारियों से वह यह साबित करना चाहता है कि देश में अल्पसंख्यकों के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता पूरी तरह सुरक्षित हैं। पाकिस्तान की सरकार और स्थानीय प्रशासन इन तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
सीमा पार से आने वाले श्रद्धालु भी इस पवित्र यात्रा को लेकर बेहद उत्साहित हैं।
उनके लिए ननकाना साहिब की यात्रा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आत्मिक और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है, जो उन्हें उनके गुरु और विरासत से जोड़ती है।
यह यात्रा गुरु नानक देव जी के उस संदेश को फिर से जीवंत करती है —
“न कोई हिंदू, न कोई मुसलमान — सब एक ही ईश्वर की संतान हैं।”

