देशभर में जहरीले कफ सिरप से मचा हड़कंप
नई दिल्ली। देश में एक बार फिर जहरीले कफ सिरप का मामला सुर्खियों में है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में 19 मासूम बच्चों की मौत के बाद कई राज्य सरकारों ने इस खतरनाक दवा पर सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु ने Coldrif Cough Syrup पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ने राज्य-स्तरीय जांच और सैंपलिंग अभियान शुरू कर दिए हैं।
फिलहाल जांच का फोकस तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित फार्मा कंपनी M/s Sresan Pharmaceutical पर है, जिसने यह जहरीला सिरप तैयार किया था। शुरुआती रिपोर्टों में इस सिरप में डाईएथिलीन ग्लाइकोल (Diethylene Glycol) नामक जहरीला रसायन पाया गया है, जो किडनी फेलियर और मल्टी-ऑर्गन डैमेज का कारण बनता है।
चार राज्यों में फैला खतरा, अब तक 19 मासूमों की जान गई
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि की है कि अब तक 16 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि राजस्थान में 3 बच्चों की जान गई है। इन सभी मामलों में बच्चों को सर्दी-खांसी की दिक्कत थी और उन्हें स्थानीय डॉक्टरों या मेडिकल स्टोर्स से Coldrif Syrup (बैच नंबर SR-13) दिया गया था।
इलाज के दौरान बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ी और किडनी फेल होने के बाद मौत हो गई। सूत्रों के अनुसार, जांच में पाया गया कि सिरप में उपयोग किया गया बेस केमिकल डाईएथिलीन ग्लाइकोल दूषित था।
महाराष्ट्र ने लगाया तत्काल बैन, कंपनी पर FIR की तैयारी
महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने रविवार को आदेश जारी करते हुए Coldrif Syrup (बैच SR-13) की बिक्री, वितरण और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।
राज्य के औषधि नियंत्रक अधिकारी ने बताया कि सभी मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों को सिरप की स्टॉक लिस्ट वापस करने या नष्ट करने का निर्देश दिया गया है।
FDA ने सिरप के सैंपल जांच के लिए सरकारी लैब में भेज दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती है।
उत्तर प्रदेश में सैंपलिंग और जब्ती का बड़ा अभियान
उत्तर प्रदेश ड्रग्स विभाग ने सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को सख्त निर्देश दिए हैं। विभाग ने Coldrif Syrup के सैंपल फार्मा कंपनियों, अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स से एकत्र करने को कहा है।
सभी नमूनों को लखनऊ की राज्य प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। इसके अलावा, Propylene Glycol (जो सिरप में उपयोग होने वाला बेस केमिकल है) का भी नमूना लेकर मिलावट की मात्रा का परीक्षण किया जाएगा।
FSDA ने चेतावनी दी है कि राज्य में कहीं भी Sresan Pharma का सिरप मिलने पर तुरंत जब्त कर लिया जाएगा।
UP मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन को भी निर्देश मिला है कि वे अपने गोदामों में इस सिरप की जांच करें और स्टॉक मिलने पर तुरंत रिपोर्ट दें।
उत्तराखंड सरकार का अलर्ट — “5 साल से कम बच्चों को न दें सिरप”
उत्तराखंड स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने सभी जिलाधिकारियों और सीएमओ को आदेश दिया है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार की सर्दी-खांसी की दवा न दी जाए।
5 साल तक के बच्चों के लिए ऐसी दवाएं केवल विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह पर ही दी जाएं।
डॉ. कुमार ने कहा, “अक्सर बच्चों की खांसी या सर्दी अपने आप ठीक हो जाती है। अनावश्यक रूप से कफ सिरप देना उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।” उन्होंने डॉक्टरों और फार्मासिस्टों से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा है।
केरल और तेलंगाना में भी अलर्ट जारी
केरल ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट ने सभी मेडिकल स्टोर्स को आदेश दिया है कि वे Coldrif Syrup को तुरंत शेल्फ से हटा दें और बिक्री बंद करें।
वहीं तेलंगाना ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (DCA) ने बैच नंबर SR-13 के लिए “Public Alert – Stop Use Notice” जारी किया है। एजेंसी ने बताया कि सिरप में पाया गया DEG (Diethylene Glycol) बच्चों के लिए अत्यंत घातक न्यूरोलॉजिकल और रीनल डैमेज का कारण बन सकता है।
एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि “यह मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ड्रग क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम की कमियों को उजागर करता है।”
फार्मा सेफ्टी पर उठे सवाल, केंद्र सरकार कर सकती है सख्त कदम
यह घटना भारत में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठाती है। पिछले दो वर्षों में भारत से जुड़े कई टॉक्सिक सिरप मामलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता पैदा की है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, सरकार फार्मास्यूटिकल क्वालिटी कंट्रोल और टेस्टिंग सिस्टम को सख्त करने की तैयारी में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे स्तर पर बनने वाली दवाओं की कच्चे माल की जांच और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को और मजबूत करना जरूरी है।
बच्चों की सुरक्षा पर अब किसी तरह की ढिलाई नहीं
“कफ सिरप कांड” ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि बच्चों की दवा से जुड़ी लापरवाही कितनी खतरनाक हो सकती है। राज्यों की जांच और बैन की कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब फार्मा कंपनियों की निगरानी और लाइसेंसिंग प्रक्रिया पारदर्शी और कठोर बनाई जाएगी।

