EU Sanctions: ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव तेज, रिवोल्यूशनरी गार्ड पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा EU

EU Sanctions
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EU Sanctions: ईरान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। देश के भीतर चल रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबाने के आरोपों के बीच यूरोपीय संघ (EU) ने ईरान के अर्धसैनिक बल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पर सख्त प्रतिबंध लगाने की संभावना जताई है। यदि यह कदम उठाया जाता है, तो यह ईरान के लिए कूटनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

विरोध प्रदर्शनों पर सख्ती बनी वजह

ईरान में पिछले कुछ समय से आर्थिक बदहाली, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन हो रहे हैं। शुरुआत में ये विरोध केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित थे, लेकिन धीरे-धीरे यह सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गए। ईरानी सुरक्षा बलों, विशेष रूप से रिवोल्यूशनरी गार्ड पर इन प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से कुचलने के आरोप लगे हैं।

इसी पृष्ठभूमि में यूरोपीय संघ ने संकेत दिया है कि वह रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठनों की श्रेणी में डालने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

EU का सख्त रुख

यूरोपीय संघ की विदेश एवं सुरक्षा नीति प्रमुख काजा कलास ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि रिवोल्यूशनरी गार्ड पर प्रतिबंध लगाना “संभावित” विकल्पों में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,

“यदि कोई संगठन आतंकवादी की तरह कार्य करता है, तो उसे आतंकवादी ही माना जाना चाहिए।”

कलास ने संकेत दिया कि यदि प्रतिबंध लगाए जाते हैं, तो IRGC को अल-कायदा, हमास और आईएस जैसे संगठनों की श्रेणी में रखा जा सकता है। ऐसा होने पर यूरोप में रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन, यात्रा और गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लग सकता है।

अमेरिका की सैन्य चेतावनी से बढ़ा तनाव

ईरान पहले से ही अमेरिका के सख्त रुख का सामना कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। अमेरिका ने यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे युद्धपोत और निर्देशित मिसाइलों से लैस नौसैनिक जहाजों को मध्य पूर्व क्षेत्र में तैनात किया है।

अमेरिका का कहना है कि यह तैनाती सुरक्षा और प्रतिरोध के उद्देश्य से की गई है, लेकिन ईरान इसे खुली धमकी के रूप में देख रहा है।

ईरान की पलटवार की चेतावनी

अमेरिकी और यूरोपीय दबाव के बीच ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी नेतृत्व ने संकेत दिया है कि यदि उस पर हमला किया गया, तो वह पूर्व-आक्रमण (pre-emptive strike) कर सकता है या पूरे मध्य पूर्व में व्यापक कार्रवाई कर सकता है।

इसमें क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे और इज़राइल संभावित लक्ष्य हो सकते हैं। इससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

आर्थिक संकट और गहराया

ईरान की अर्थव्यवस्था पहले ही अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रही है। अब यूरोपीय संघ की संभावित कार्रवाई ने आर्थिक दबाव को और बढ़ा दिया है।

गुरुवार को ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 16 लाख प्रति डॉलर पर पहुंच गई। मुद्रा के इस ऐतिहासिक पतन ने आम जनता की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही आर्थिक बदहाली विरोध प्रदर्शनों की मुख्य वजह बनी है।

ईरान की चुप्पी

यूरोपीय संघ के बयान और प्रतिबंधों की संभावनाओं पर फिलहाल ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, अतीत में ईरान इस तरह के कदमों को “राजनीतिक दबाव” और “पश्चिमी साजिश” करार देता रहा है।

आगे क्या?

विश्लेषकों का मानना है कि यदि EU वास्तव में रिवोल्यूशनरी गार्ड पर प्रतिबंध लगाता है, तो ईरान और पश्चिमी देशों के रिश्ते और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं। इससे न केवल कूटनीतिक बातचीत के रास्ते सीमित होंगे, बल्कि मध्य पूर्व में सैन्य टकराव की आशंका भी बढ़ सकती है।