Bangladesh New PM: 17 साल बाद लौटे तारिक रहमान, निर्वासन से प्रधानमंत्री पद तक का सफर

Bangladesh New PM
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Bangladesh New PM: बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। 12 फरवरी को संपन्न हुए 13वें संसदीय चुनावों में Bangladesh Nationalist Party (बीएनपी) ने जबरदस्त बहुमत हासिल कर ‘लैंडस्लाइड विक्ट्री’ दर्ज की। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही पार्टी के कार्यकारी चेयरमैन तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। उन्होंने सरकार गठन के लिए आधिकारिक दावा भी पेश कर दिया है, जिससे देश की सियासत में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है।

सत्ता और संघर्ष के बीच बीता जीवन

20 नवंबर 1965 को ढाका में जन्मे तारिक रहमान का जीवन राजनीति, सत्ता और विवादों के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। वे बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति Ziaur Rahman के पुत्र हैं, जिन्होंने बीएनपी की स्थापना की थी। उनकी मां Khaleda Zia तीन बार देश की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं। लगभग 36 वर्षों बाद बांग्लादेश को एक पुरुष प्रधानमंत्री मिलने की संभावना बन रही है।

हालांकि सत्ता के शिखर तक पहुंचने की उनकी यात्रा आसान नहीं रही। तारिक रहमान ने अपने जीवन के 17 वर्ष देश से बाहर निर्वासन में बिताए। इस दौरान उन्हें जेल, राजनीतिक मुकदमों और शारीरिक यातनाओं का सामना करना पड़ा।

बचपन से राजनीति की ओर झुकाव

तारिक रहमान की राजनीति में रुचि किशोरावस्था से ही दिखाई देने लगी थी। 1990 के दशक में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और 1991 के आम चुनावों में अपनी मां खालिदा जिया को सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2001 में जब खालिदा जिया दोबारा प्रधानमंत्री बनीं, तब पार्टी के भीतर तारिक का कद काफी बढ़ गया।

उस समय ढाका का ‘हवा भवन’ सत्ता संचालन का प्रमुख केंद्र माना जाता था, जिसे सीधे तौर पर तारिक रहमान से जोड़ा जाता था। हालांकि इसी दौर में उन पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप भी लगे। विपक्षी Awami League ने उन्हें ‘डार्क प्रिंस’ कहकर संबोधित किया, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा।

गिरफ्तारी, मुकदमे और निर्वासन

साल 2006-07 का राजनीतिक संकट उनके जीवन का सबसे कठिन दौर साबित हुआ। सैन्य समर्थित अंतरिम सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाते हुए मार्च 2007 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और 2004 के ग्रेनेड हमले सहित कुल 84 मामले दर्ज किए गए।

जेल में रहने के दौरान उन्हें गंभीर यातनाओं का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई। सितंबर 2008 में जमानत मिलने के बाद वे इलाज के बहाने पत्नी जुबैदा और बेटी ज़ैमा के साथ लंदन चले गए। इसके बाद लगभग 17 वर्षों तक वे वहीं से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पार्टी का नेतृत्व करते रहे।

मौत की सजा से वापसी तक

Sheikh Hasina के 15 साल लंबे शासनकाल में एक मामले में तारिक रहमान को मौत की सजा भी सुनाई गई थी। लेकिन अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन ने बांग्लादेश की राजनीति की दिशा बदल दी। शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद Muhammad Yunus के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी, जिसने कई मामलों की पुनर्समीक्षा की।

अदालतों द्वारा आरोप निरस्त किए जाने के बाद दिसंबर 2025 में तारिक रहमान ने स्वदेश वापसी की घोषणा की। 25 दिसंबर को ढाका एयरपोर्ट पर लाखों समर्थकों ने उनका भव्य स्वागत किया।

चुनावी जीत और नई उम्मीदें

वापसी के मात्र 50 दिनों के भीतर उन्होंने चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया। इस दौरान उन्होंने अपनी मां खालिदा जिया को भी खो दिया, जो उनके लिए व्यक्तिगत रूप से बड़ा आघात था। उन्होंने ढाका-17 और बोगरा-6 सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों जगह शानदार जीत हासिल की।

60 वर्ष की आयु में अब तारिक रहमान खुद को एक परिपक्व और संतुलित नेता के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने स्वच्छ राजनीति, भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’, युवाओं के लिए रोजगार सृजन और लोकतंत्र की पूर्ण बहाली का वादा किया है।

बांग्लादेश की जनता अब यह देख रही है कि क्या संघर्ष और विवादों से भरी उनकी राजनीतिक यात्रा देश को स्थिरता और नई दिशा दे पाएगी।