Donald Trump Warns Iran: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने तेवर और सख्त कर दिए हैं। गुरुवार को वॉशिंगटन में इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ हुई अहम बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अगर ईरान परमाणु समझौते पर सहमत नहीं होता, तो उसे “बहुत दर्दनाक परिणाम” भुगतने होंगे।
ट्रंप ने बैठक को “बहुत सकारात्मक” बताते हुए कहा कि ईरान के साथ एक नया और मजबूत समझौता करना समय की मांग है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता देता है, लेकिन अगर तेहरान पीछे हटता है, तो विकल्प खुले हैं।
“समझौता जरूरी, नहीं तो हालात गंभीर”
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “हमें एक डील करनी ही होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हालात बेहद गंभीर हो जाएंगे। मैं टकराव नहीं चाहता, लेकिन हमें मजबूरी में कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान को पहले ही समझौते के लिए तैयार हो जाना चाहिए था, लेकिन उसने अवसर गंवा दिया।
अपने बयान में ट्रंप ने “Midnight Hammer” का उल्लेख किया, जो जून 2025 में ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर अमेरिका द्वारा किए गए हमलों का संदर्भ माना जा रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि ईरान अब भी सख्ती को नजरअंदाज करता है, तो भविष्य की कार्रवाई और भी कठोर हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय परिस्थितियों और ईरान की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
नेतन्याहू का समर्थन, लेकिन सतर्कता बरकरार
बैठक के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप को “इजराइल का सच्चा मित्र” बताया। मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रूज से रवाना होते समय उन्होंने कहा कि यह दौरा छोटा जरूर था, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण रहा।
नेतन्याहू के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच ईरान के मुद्दे पर गहन चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि ट्रंप की सख्त शर्तों और स्पष्ट संदेश से ईरान पर दबाव बना है। “ईरान अब समझ चुका है कि वह किससे बातचीत कर रहा है,” नेतन्याहू ने कहा, इशारा करते हुए कि इस बार तेहरान समझौते को हल्के में नहीं ले सकता।
हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि वे किसी भी संभावित समझौते को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। नेतन्याहू का मानना है कि किसी भी नई परमाणु डील में सिर्फ यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों (प्रॉक्सी समूहों) की गतिविधियों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
व्यापक रणनीति पर जोर
इजराइल लंबे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम केवल एक हिस्सा है; असली चिंता उसकी मिसाइल क्षमता और पश्चिम एशिया में सक्रिय सहयोगी समूह हैं। नेतन्याहू ने कहा कि यह शर्तें न सिर्फ इजराइल की सुरक्षा के लिए, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी जरूरी हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और इजराइल की यह संयुक्त रणनीति ईरान पर कूटनीतिक और सैन्य—दोनों स्तरों पर दबाव बनाने की कोशिश है। हालांकि यह भी स्पष्ट है कि इस तरह की चेतावनियां क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकती हैं।
गाजा और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा
बैठक के दौरान गाजा की स्थिति पर भी चर्चा हुई। नेतन्याहू ने ट्रंप के साथ हुई बातचीत को “उत्कृष्ट” बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं। उन्होंने ट्रंप को “अलग तरह का राष्ट्रपति” बताते हुए कहा कि उनकी नीति स्पष्ट और निर्णायक है।
गाजा में जारी संघर्ष और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए यह बैठक पश्चिम एशिया की राजनीति के लिए अहम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या ईरान कूटनीतिक रास्ता अपनाता है या टकराव की स्थिति और गहराती है।
फिलहाल, ट्रंप का संदेश साफ है—समझौता या सख्त परिणाम।

