Bangladesh News: बांग्लादेश फिर कटघरे में: अब पुलिस हिरासत में BNP हिंदू नेता की मौत, मचा बवाल

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Bangladesh News: बांग्लादेश में एक बार फिर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार मामला पुलिस और जेल हिरासत में एक हिंदू नेता की मौत से जुड़ा है, जिसने देश की राजनीति और मानवाधिकार बहस को गर्मा दिया है। जानकारी के अनुसार, अवामी लीग से जुड़े वरिष्ठ हिंदू नेता और प्रसिद्ध सांस्कृतिक हस्ती प्रलय चकी की हिरासत में मौत हो गई। इस घटना के बाद विपक्ष, सामाजिक संगठनों और अल्पसंख्यक समुदाय में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

मृतक की पहचान 60 वर्षीय प्रलय चकी के रूप में हुई है, जो अवामी लीग की पाबना जिला इकाई में सांस्कृतिक मामलों के सचिव थे। राजनीति के साथ-साथ वे बांग्लादेश के सांस्कृतिक जगत में भी एक जाना-पहचाना नाम थे। 1990 के दशक में उन्होंने बतौर गायक और संगीत निर्देशक अपनी अलग पहचान बनाई थी। बांग्लादेश के प्रमुख अख़बार द डेली स्टार के अनुसार, रविवार रात राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उस समय वे जेल हिरासत में थे और उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी।

बताया जा रहा है कि प्रलय चकी को वर्ष 2024 के ‘भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन’ से जुड़े एक विस्फोट मामले में गिरफ्तार किया गया था। यही आंदोलन आगे चलकर ‘जुलाई विद्रोह’ के नाम से जाना गया, जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता को भी हिला दिया था। इस मामले में चकी की गिरफ्तारी को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं। परिवार का आरोप है कि उन्हें बिना स्पष्ट आरोपों और नामजद किए गिरफ्तार किया गया और बाद में एक गंभीर मामले में फंसा दिया गया।

पाबना जेल के अधीक्षक मोहम्मद ओमर फारूक ने मीडिया को बताया कि प्रलय चकी पहले से कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। उन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग की शिकायत थी। जेल प्रशासन के मुताबिक, जब उनकी तबीयत बिगड़ने लगी तो उन्हें पहले पाबना सदर अस्पताल ले जाया गया। हालत में सुधार न होने पर शुक्रवार रात उन्हें राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान रविवार रात उनकी मौत हो गई।

हालांकि, मृतक के परिजनों ने जेल प्रशासन के दावों को सिरे से खारिज किया है। प्रलय चकी के बेटे सोनी चकी का कहना है कि उनके पिता की तबीयत जेल में रहते हुए लगातार बिगड़ती रही, लेकिन परिवार को समय पर इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो समय पर इलाज कराया गया और न ही परिवार को मिलने की अनुमति दी गई। सोनी चकी के अनुसार, अगर समय रहते उचित चिकित्सा सुविधा दी जाती, तो शायद उनके पिता की जान बचाई जा सकती थी।

इस घटना पर सांस्कृतिक और सामाजिक संगठनों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पाबना सम्मिलित सांस्कृतिक जोत के सचिव भास्कर चौधरी ने कहा कि प्रलय चकी केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि वे बांग्लादेश की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा थे। उन्होंने 1990 के दशक में कई महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आंदोलनों का नेतृत्व किया था। भास्कर चौधरी ने हिरासत में हुई इस मौत को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

प्रलय चकी की मौत ऐसे समय पर हुई है जब बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। हाल के महीनों में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा, भीड़ द्वारा हमले और लक्षित हत्याओं की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इन घटनाओं ने न केवल देश के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है।

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हिरासत में मौत की यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सभी की निगाहें सरकार और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा, या यह मामला भी अन्य विवादों की तरह समय के साथ दबा दिया जाएगा।bangladesh-hindu-leader-death-police-custody