दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक Apple में नेतृत्व परिवर्तन का एक बड़ा अध्याय शुरू होने जा रहा है। कंपनी के लंबे समय से मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे Tim Cook ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। लगभग 15 वर्षों तक कंपनी की कमान संभालने के बाद कुक 1 सितंबर को औपचारिक रूप से CEO पद छोड़ देंगे। उनके स्थान पर कंपनी के हार्डवेयर इंजीनियरिंग प्रमुख John Ternus को नया CEO नियुक्त किया गया है।
यह बदलाव Steve Jobs के बाद एप्पल के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन माना जा रहा है। टिम कुक ने 2011 में जॉब्स के निधन के बाद कंपनी की जिम्मेदारी संभाली थी और तब से उन्होंने एप्पल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
65 वर्षीय टिम कुक के कार्यकाल में एप्पल का बाजार मूल्य अभूतपूर्व तरीके से बढ़ा। कंपनी ने आईफोन और अन्य प्रोडक्ट्स की सफलता के दम पर 3.6 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का मार्केट कैप हासिल किया, जो इसे दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल करता है। कुक के नेतृत्व में कंपनी ने न केवल अपने उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार किया, बल्कि सेवाओं के क्षेत्र में भी मजबूत पकड़ बनाई।
हालांकि, कुक पूरी तरह से कंपनी से अलग नहीं होंगे। वे अब कार्यकारी अध्यक्ष (Executive Chairman) की भूमिका में रहेंगे, जहां वे कंपनी को रणनीतिक दिशा और मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे। यह मॉडल पहले भी कई बड़ी टेक कंपनियों में देखा गया है, जैसे Jeff Bezos और Reed Hastings ने अपनाया था।
नए CEO के रूप में जॉन टर्नस की नियुक्ति को कंपनी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टर्नस लंबे समय से एप्पल के हार्डवेयर डिवीजन से जुड़े रहे हैं और उन्होंने कई प्रमुख उत्पादों के विकास में अहम भूमिका निभाई है। उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और कंपनी के अंदरूनी अनुभव को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि वे एप्पल को आगे भी प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाए रखेंगे।
इस नेतृत्व परिवर्तन के बीच एप्पल भारत में एक बड़ी कानूनी चुनौती का सामना कर रहा है। Competition Commission of India ने कंपनी के खिलाफ एंटीट्रस्ट जांच को तेज कर दिया है। यह जांच आईफोन ऐप मार्केट में कंपनी के प्रभुत्व और उसके संभावित दुरुपयोग को लेकर की जा रही है। इस मामले की अंतिम सुनवाई 21 मई को तय की गई है।
अगर एप्पल इस जांच में दोषी पाई जाती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, जिसकी राशि लगभग 38 अरब डॉलर तक हो सकती है। यह कंपनी के लिए एक बड़ा वित्तीय झटका साबित हो सकता है।
यह विवाद 2021 में शुरू हुआ था, जब कई भारतीय स्टार्टअप्स और Match Group ने एप्पल के बिजनेस मॉडल पर सवाल उठाए थे। आरोप लगाया गया था कि कंपनी डेवलपर्स को अपने ‘इन-ऐप पर्चेज’ (In-App Purchase – IAP) सिस्टम का उपयोग करने के लिए बाध्य करती है, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है।
जांच के दौरान Apple पर यह भी आरोप लगा है कि उसने आवश्यक वित्तीय जानकारी देने में देरी की है। सीसीआई के अनुसार, कंपनी अक्टूबर 2024 से जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने में असफल रही है और उसने Delhi High Court में भारत के एंटीट्रस्ट कानूनों को चुनौती देकर जांच प्रक्रिया को धीमा करने की कोशिश की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एप्पल समय पर आवश्यक जानकारी जमा नहीं करती है, तो जुर्माने के खिलाफ उसकी दलीलें कमजोर पड़ सकती हैं।
कुल मिलाकर, एप्पल के लिए यह समय बदलाव और चुनौतियों से भरा हुआ है। एक ओर जहां कंपनी नए नेतृत्व के साथ भविष्य की ओर बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर उसे कानूनी और नियामकीय मोर्चों पर भी कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जॉन टर्नस के नेतृत्व में कंपनी किस दिशा में आगे बढ़ती है और इन चुनौतियों से कैसे निपटती है।

