Hungary की राजनीति में हाल ही में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां नए प्रधानमंत्री Peter Magyar ने सत्ता संभालते ही अपनी विदेश नीति और कानूनी रुख को लेकर सख्त संकेत दिए हैं। उन्होंने एक ऐसा बयान दिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को तेज कर दिया है। मैग्यार ने स्पष्ट कहा है कि अगर Israel के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu हंगरी आते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
यह बयान इसलिए और भी चौंकाने वाला है क्योंकि कुछ ही समय पहले मैग्यार ने नेतन्याहू को हंगरी आने का निमंत्रण दिया था। अब उन्होंने यह साफ कर दिया है कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करेगा और किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जिसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट हो, हिरासत में लिया जा सकता है।
दरअसल, International Criminal Court ने वर्ष 2024 में नेतन्याहू के खिलाफ युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इस वारंट के बाद से कई देशों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि यदि नेतन्याहू उनके देश का दौरा करते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार किया जाए या नहीं। हंगरी के नए प्रधानमंत्री ने इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि उनका देश ICC के नियमों का सम्मान करेगा।
मैग्यार ने यह भी संकेत दिया है कि वह हंगरी को ICC से बाहर करने के फैसले को रद्द कर सकते हैं। यह निर्णय पूर्व प्रधानमंत्री Viktor Orban द्वारा लिया गया था, जो 2 जून 2026 से लागू होने वाला था। अगर मैग्यार इस फैसले को पलटते हैं, तो यह हंगरी की अंतरराष्ट्रीय नीति में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।
हालांकि, मैग्यार ने यह भी स्पष्ट किया कि नेतन्याहू को दिया गया निमंत्रण एक विशेष कार्यक्रम के लिए था। यह कार्यक्रम 1956 के हंगेरियन आंदोलन की 70वीं वर्षगांठ से जुड़ा है, जिसमें दुनिया भर के नेताओं को आमंत्रित किया गया है। उनका कहना है कि यह निमंत्रण किसी विशेष राजनीतिक समर्थन के रूप में नहीं था, बल्कि एक औपचारिक और कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा था।
हाल ही में हुए चुनावों में पीटर मैग्यार ने लंबे समय तक सत्ता में रहे विक्टर ओरबान को हराकर यह पद हासिल किया है। ओरबान लगभग 16 वर्षों तक हंगरी के प्रधानमंत्री रहे और उनकी नीतियां अक्सर यूरोपीय संघ के साथ टकराव में रही थीं। अब मैग्यार ने संकेत दिए हैं कि वह European Union और NATO के साथ संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं।
मैग्यार का यह रुख दिखाता है कि वह हंगरी की छवि को एक ऐसे देश के रूप में स्थापित करना चाहते हैं जो अंतरराष्ट्रीय नियमों और संस्थाओं का सम्मान करता है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि अगर नेतन्याहू वास्तव में हंगरी का दौरा करते हैं, तो क्या सरकार अपने इस बयान पर कायम रहती है या फिर कोई कूटनीतिक समाधान निकाला जाता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां कुछ लोग इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ इसे कूटनीतिक जटिलताओं को बढ़ाने वाला कदम मानते हैं।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि हंगरी इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और क्या यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय संबंधों में किसी बड़े बदलाव का कारण बनती है।

