UP Holi 2026: योगी सरकार का बड़ा फैसला, 28 फरवरी को सैलरी लेकिन 47 हजार कर्मचारियों का वेतन रुका

UP Holi 2026
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UP Holi 2026: उत्तर प्रदेश में होली से पहले सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए एक ओर जहां राहत भरी खबर आई है, वहीं दूसरी ओर हजारों कर्मचारियों के लिए सख्त संदेश भी दिया गया है। Yogi Adityanath के नेतृत्व वाली सरकार ने फरवरी 2026 का वेतन और पेंशन निर्धारित तिथि से पहले जारी करने का आदेश दिया है। इसके तहत राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों को 28 फरवरी को ही वेतन और पेंशन का भुगतान कर दिया जाएगा, ताकि वे होली का त्योहार बिना आर्थिक परेशानी के मना सकें।

लेकिन इस फैसले के साथ ही लगभग 46,816 अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। जिन कर्मियों ने अपनी चल और अचल संपत्ति का विवरण निर्धारित समय सीमा तक अपलोड नहीं किया है, उनका वेतन रोक दिया गया है। इस निर्देश के बाद कई विभागों में हलचल मच गई है।

क्यों रोका गया वेतन?

मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से जारी आदेश के अनुसार, सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को 31 जनवरी 2026 तक अपनी संपत्ति का ब्यौरा ‘मानव संपदा पोर्टल’ पर अपलोड करना अनिवार्य था। यह नियम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

हालांकि, बार-बार चेतावनी और निर्देशों के बावजूद करीब 47 हजार कर्मचारियों ने इस प्रक्रिया को पूरा नहीं किया। परिणामस्वरूप इन कर्मचारियों का जनवरी का वेतन पहले ही रोक दिया गया था और अब फरवरी का वेतन भी जारी नहीं किया जाएगा। इससे इन कर्मियों की होली फीकी पड़ सकती है।

10 मार्च तक अंतिम मौका

सरकार ने सख्ती के साथ राहत का रास्ता भी खुला रखा है। 26 फरवरी से 10 मार्च 2026 तक ‘मानव संपदा पोर्टल’ को दोबारा खोला गया है। जिन कर्मचारियों का वेतन रुका है, वे इस अवधि के भीतर अपनी संपत्ति का विवरण अपडेट कर सकते हैं।

यदि कर्मचारी 10 मार्च तक अनिवार्य जानकारी अपलोड कर देते हैं, तो उनका रुका हुआ जनवरी और फरवरी दोनों महीनों का वेतन जारी कर दिया जाएगा। लेकिन यदि इस बार भी लापरवाही की गई, तो केवल वेतन ही नहीं रुकेगा बल्कि आगे प्रमोशन पर रोक, विदेश यात्रा की अनुमति में बाधा और विभागीय जांच जैसी कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

लापरवाह अधिकारियों पर भी कार्रवाई

वित्त विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होगा। यदि किसी विभाग ने बिना संपत्ति विवरण अपलोड किए कर्मचारी को जनवरी का वेतन जारी कर दिया है, तो संबंधित आहरण-वितरण अधिकारी (DDO) के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार इस मुद्दे पर किसी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

त्योहार से पहले राहत

सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य यह है कि अधिकतर कर्मचारियों और पेंशनरों को होली से पहले आर्थिक राहत मिल सके। 28 फरवरी को वेतन और पेंशन जारी करने से बाजार में भी रौनक बढ़ने की उम्मीद है। त्योहार के दौरान खर्च बढ़ता है, ऐसे में समय से पहले वेतन मिलना कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

पारदर्शिता पर सरकार का जोर

विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्ति विवरण अनिवार्य करने का फैसला प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और सरकारी तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

एक ओर जहां लाखों कर्मचारियों के लिए यह होली खुशियों भरी रहने वाली है, वहीं दूसरी ओर नियमों की अनदेखी करने वाले हजारों कर्मचारियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें 10 मार्च की अंतिम तिथि पर टिकी हैं।