Noida Violence Digital Conspiracy: नोएडा में मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ श्रमिक आंदोलन अब एक बड़े डिजिटल षड्यंत्र की शक्ल लेता नजर आ रहा है। शुरुआती जांच में पुलिस को ऐसे संकेत मिले हैं, जो इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सुनियोजित सोशल मीडिया नेटवर्क, फर्जी अकाउंट्स और संभावित विदेशी फंडिंग की ओर इशारा करते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब उत्तर प्रदेश एसटीएफ को सौंप दी गई है।
QR कोड और WhatsApp ग्रुप से भीड़ जुटाने का आरोप
गौतम बुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के अनुसार, हिंसा से ठीक पहले एक संगठित डिजिटल नेटवर्क सक्रिय हुआ था। बड़ी संख्या में नए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए, जिनमें QR कोड के जरिए लोगों को जोड़ा गया। पुलिस को शक है कि इस तकनीक का इस्तेमाल भीड़ को तेजी से इकट्ठा करने और उन्हें भड़काने के लिए किया गया।
यह तरीका खास तौर पर चिंताजनक माना जा रहा है क्योंकि QR कोड के जरिए बिना सीधे संपर्क के बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच बनाना आसान हो जाता है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन ग्रुप्स को किसने बनाया और इनके पीछे किसका नेटवर्क काम कर रहा था।
सोशल मीडिया पर अफवाहों का जाल
पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर भड़काऊ सामग्री फैलाने के आरोप में दो हैंडल्स के खिलाफ FIR दर्ज की है। इसके अलावा, 50 से अधिक बॉट अकाउंट्स की पहचान की गई है, जिन्हें पिछले 24 घंटों के भीतर ही बनाया गया था और जिनका उद्देश्य केवल अफवाह फैलाना था।
जांच में यह भी सामने आया है कि इन अकाउंट्स के जरिए लगातार भड़काऊ संदेश, गलत जानकारी और हिंसा के लिए उकसाने वाली पोस्ट शेयर की जा रही थीं। इससे स्थिति और बिगड़ गई और प्रदर्शन हिंसक रूप ले बैठा।
300 से ज्यादा लोग हिरासत में
हिंसा, पथराव और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में अब तक 300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। साथ ही, 7 अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं। पुलिस ने साफ कर दिया है कि अगर इस पूरे घटनाक्रम के पीछे किसी भी तरह की देशी या विदेशी फंडिंग के सबूत मिलते हैं, तो आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें देशद्रोह जैसी गंभीर धाराएं भी शामिल हो सकती हैं।
सरकार का वेतन बढ़ाने का फैसला
इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने हालात को शांत करने के लिए न्यूनतम मजदूरी में अंतरिम बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह फैसला 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना जाएगा। अलग-अलग श्रेणियों में मजदूरी में लगभग ₹3000 तक की बढ़ोतरी की गई है।
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि अगले महीने एक वेज बोर्ड का गठन किया जाएगा, जो स्थायी वेतन निर्धारण पर अपनी सिफारिशें देगा। इस कदम को श्रमिकों के गुस्से को कम करने और स्थिति को सामान्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
₹20,000 वेतन की खबर फर्जी
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ₹20,000 न्यूनतम वेतन की खबर को सरकार ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अधिकारियों ने इसे झूठी और भ्रामक जानकारी बताते हुए लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।
लखनऊ से हो रही निगरानी
पूरे मामले की निगरानी लखनऊ से की जा रही है। डीजीपी राजीव कृष्ण और एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) अमिताभ यश लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और हर अपडेट ले रहे हैं।
प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि श्रमिकों की जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा, लेकिन हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से हर्जाना भी वसूला जाएगा।
नोएडा का यह मामला अब केवल श्रमिक आंदोलन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग और संगठित साजिश की ओर भी इशारा कर रहा है। आने वाले दिनों में STF की जांच से यह साफ हो सकेगा कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कौन लोग और कौन से नेटवर्क सक्रिय थे।

