बलिया: 27 साल पहले बनी सड़क झाड़ियों में गुम, ग्रामीण आज भी तलाश रहे रास्ता

बलिया। सरकार जहां एक ओर नहरों के जीर्णोद्धार और मरम्मत के साथ दोनों पटरियों पर सुगम आवागमन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर बलिया जिले के बांसडीह तहसील क्षेत्र का सुखपुरा इलाका उपेक्षा का शिकार है। सुखपुरा से सावन सिकड़िया होते हुए अपायल गांव तक महज पांच किलोमीटर लंबी नहर पटरी की सड़क पिछले करीब 27–28 सालों से बदहाल पड़ी है। कभी इस मार्ग पर ईंट का खड़ंजा बिछा था, लेकिन अब उसका नामोनिशान मिट चुका है। जगह-जगह झाड़–झंखाड़ उग आए हैं और सड़क मानो मानचित्र से ही गायब हो गई हो।

ग्रामीणों की दुश्वारियां

58 वर्षीय रामेश्वर बताते हैं, “करीब 27 साल पहले यहां सड़क बनी थी, उसके बाद से दोबारा कोई काम नहीं हुआ। सड़क गुम हो गई, तो झाड़ियां पसर गईं और रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।”
उनकी बात पर नंदकिशोर भी सहमति जताते हुए कहते हैं, “हमारी उम्र 27 साल हो गई, लेकिन इस सड़क को दोबारा बनते कभी नहीं देखा। अब तो हालत यह है कि दिन में भी यहां से निकलने में डर लगता है। बड़े-बड़े झाड़, जहरीले जीव-जंतु और रास्ता बंद होने से आवागमन मुश्किल हो गया है।”

विकास से कोसों दूर

यह बदहाली जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर सुखपुरा इलाके की है। सरकार गांव-गांव सड़कें बिछाने का दावा करती है, लेकिन यहां की तस्वीर हकीकत उजागर करती है। ग्रामीण बताते हैं कि चुनाव के समय यह मुद्दा उठा था और सड़क पिच बनाने की बात भी हुई थी, लेकिन चुनाव खत्म होते ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

एक किलोमीटर की दूरी तय करने को 5 किलोमीटर

सड़क न होने से ग्रामीणों को रोजमर्रा के जीवन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए उन्हें पांच किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है। खेतों में ट्रैक्टर ले जाना मुश्किल है। सबसे बड़ी समस्या आपात स्थिति में होती है—बीमार व्यक्ति या प्रसव पीड़ा से ग्रस्त महिला को समय पर अस्पताल ले जाना ग्रामीणों के लिए चुनौती बन जाता है।

उम्मीदें टूटती जा रहीं

नंदकिशोर मज़ाकिया अंदाज में कहते हैं, “शायद यह सड़क हमारे जन्म से पहले बनी थी। जब से होश संभाला है, तब से यहां सिर्फ झाड़ियां ही देखी हैं।”
ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें किसी ऐसे नेतृत्वकर्ता की तलाश है, जो उनकी समस्या को समझे और इस सड़क को दोबारा बनवाकर आवागमन की मुश्किलें खत्म करे।