Diwali 2025। भारतीय संस्कृति में हर त्योहार की अपनी एक खास पहचान और महत्व होता है। इन सभी पर्वों में दिवाली यानी दीपावली का स्थान सर्वोपरि है। यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी बेहद खास माना जाता है। दीपों का यह पर्व हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। साल 2025 में दिवाली का पर्व सोमवार, 20 अक्टूबर को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर की दोपहर 3:45 बजे से शुरू होकर अगले दिन यानी 21 अक्टूबर की दोपहर 3:35 बजे तक रहेगी। लेकिन चूंकि प्रदोष काल 20 अक्टूबर की शाम को पड़ रहा है, इसलिए लक्ष्मी-गणेश पूजन और दीपोत्सव इसी दिन संपन्न होगा।
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Toggleदिवाली 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू धर्म में मान्यता है कि किसी भी पूजा का फल तभी मिलता है जब वह सही समय और मुहूर्त में की जाए। दिवाली पर सबसे खास होता है लक्ष्मी-गणेश पूजन, जिसे प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है।
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अमावस्या तिथि प्रारंभ: 20 अक्टूबर 2025, दोपहर 3:45 बजे
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अमावस्या तिथि समाप्त: 21 अक्टूबर 2025, दोपहर 3:35 बजे
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लक्ष्मी पूजन मुहूर्त (प्रदोष काल): शाम 6:05 से रात 8:20 बजे तक
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निशीथ काल पूजा: रात 11:35 से रात 12:25 बजे तक
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प्रदीपदान मुहूर्त: सूर्यास्त के बाद से रात 8:30 बजे तक
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन मुहूर्तों में श्रद्धा से पूजन किया जाए तो जीवन में सुख-समृद्धि, धन, वैभव और शांति की प्राप्ति होती है। Diwali 2025
दिवाली पूजा विधि और सामग्री
घर की सफाई और सजावट
दिवाली से पहले घर की संपूर्ण सफाई करना आवश्यक माना जाता है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी स्वच्छ और प्रकाशमय घर में ही निवास करती हैं। इसीलिए लोग अपने घर को रंग-रोगन करते हैं, नई सजावट करते हैं और दरवाजे पर रंगोली और तोरण लगाते हैं। Diwali 2025
पूजन स्थल की तैयारी
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लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
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चौकी पर कलश रखें जिसमें जल, सुपारी, आम्रपल्लव और सिक्के हों।
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पूजा थाली में दीपक, धूप, अगरबत्ती, चंदन, रोली, हल्दी, अक्षत, फल और मिठाई रखें।
पूजा की प्रक्रिया
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सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें और उन्हें विघ्नहर्ता के रूप में स्मरण करें।
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इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें, उन्हें चंदन, पुष्प, अक्षत और सिक्के अर्पित करें।
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व्यापारी वर्ग इस दिन खाता-बही और तिजोरी की पूजा करता है जिसे ‘चोपड़ा पूजन’ कहते हैं।
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अंत में आरती कर घर के हर कोने में दीप जलाएं।
दिवाली का पौराणिक महत्व
दिवाली से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा भगवान श्रीराम से संबंधित है। कहा जाता है कि रावण का वध करने के बाद जब श्रीराम अयोध्या लौटे तो नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। तभी से यह पर्व प्रकाश और विजय का प्रतीक बन गया। एक अन्य मान्यता समुद्र मंथन से जुड़ी है। कहा जाता है कि कार्तिक अमावस्या को मां लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं। इसलिए यह दिन लक्ष्मी पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में दिवाली को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के विवाह दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। दक्षिण भारत में यह दिन भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर वध की स्मृति में ‘नरक चतुर्दशी’ के रूप में विशेष महत्व रखता है।
दिवाली के पांच दिन और उनका महत्व
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धनतेरस (18 अक्टूबर 2025): इस दिन सोना-चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा है।
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नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली (19 अक्टूबर 2025): यह दिन नरकासुर वध की याद में मनाया जाता है।
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दीपावली (20 अक्टूबर 2025): लक्ष्मी-गणेश पूजन और दीपोत्सव का मुख्य दिन।
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गोवर्धन पूजा (21 अक्टूबर 2025): भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की घटना का स्मरण।
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भाई दूज (22 अक्टूबर 2025): भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व।
सामाजिक और आर्थिक महत्व
दिवाली केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इस दौरान बाजारों में जबरदस्त रौनक रहती है। लोग कपड़े, गहने, इलेक्ट्रॉनिक सामान और उपहार खरीदते हैं। व्यापारी वर्ग इसे अपने नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत मानता है और खाता-बही पूजन करता है।
सामाजिक रूप से यह पर्व रिश्तों में मिठास घोलने का काम करता है। लोग आपस में मिलते हैं, उपहार और मिठाइयों का आदान-प्रदान करते हैं। यही वजह है कि दिवाली परिवार और समाज को जोड़ने का माध्यम बनती है।Diwali 2025
आधुनिक युग में दिवाली और पर्यावरण
आज के दौर में दिवाली को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं भी बढ़ी हैं। पटाखों से निकलने वाला धुआं और शोर वायु और ध्वनि प्रदूषण का कारण बनता है। विशेषज्ञ लगातार अपील कर रहे हैं कि लोग ‘ग्रीन दिवाली’ मनाएं और पटाखों के स्थान पर मिट्टी के दीये, प्राकृतिक रंगोली और पर्यावरण-हितैषी सजावट का उपयोग करें।
सरकारी संस्थान और सामाजिक संगठन भी लोगों को प्रदूषण रहित दिवाली मनाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। बच्चों और युवाओं के बीच ग्रीन दिवाली का संदेश तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
विशेषज्ञ की राय
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य रामानंद मिश्र कहते हैं—
“दिवाली का असली संदेश केवल बाहरी सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर भी प्रकाश फैलाने का पर्व है। जब हम मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, तो दरअसल हम अपने जीवन में समृद्धि और सकारात्मकता का स्वागत करते हैं। सही विधि और श्रद्धा से किया गया पूजन निश्चित रूप से जीवन में खुशहाली लाता है।”
साल 2025 में दिवाली का पर्व सोमवार, 20 अक्टूबर को पूरे देश में धूमधाम और आस्था के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने, बुराई पर अच्छाई की विजय और गरीबी से समृद्धि की ओर जाने का प्रतीक है। दिवाली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि यह हमें सिखाता है कि कठिनाई कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अंततः सत्य और प्रकाश की ही जीत होती है।

