आईबीएससी–एएमटीजेड ने 6,500 से अधिक प्रशिक्षित, 3,500 प्रमाणित पेशेवरों और 200 एमओयू संस्थानों के साथ भारत में बायोमेडिकल क्षेत्र का भविष्य बदला

• भारत का मेडिकल डिवाइस सेक्टर 2030 तक 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान; प्रमाणित बायोमेडिकल इंजीनियरों की कमी बनी बड़ी चुनौती
• हमारा मुख्य उद्देश्य केवल कौशल निर्माण नहीं बल्कि बायोमेडिकल इंजीनियरों के लिए विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त करियर बनाना है: डॉ. जितेंद्र शर्मा

विशाखापट्टनम/नई दिल्ली, भारत | सितंबर 2025:
भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मानव संसाधनों की कमी का सामना कर रहा है। भारत का मेडिकल डिवाइस सेक्टर वर्ष 2030 तक 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन प्रमाणित बायोमेडिकल इंजीनियरों की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस अंतर को पाटने के लिए, आंध्र प्रदेश मेडटेक ज़ोन (AMTZ) में इंडियन बायोमेडिकल स्किल कंसोर्टियम (IBSC) ने बायोमेडिकल क्षेत्र में 6,500 से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षण देकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

एआईएमईडी (AIMED) के साथ मिलकर एएमटीजेड द्वारा स्थापित, आईबीएससी को देश की पहली समर्पित परिषद माना जाता है, जो बायोमेडिकल इंजीनियरों को वैश्विक मान्यता दिलाती है और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कौशल-आधारित योग्यताएँ प्रदान करती है।

स्थापना के बाद से, आईबीएससी ने एनएसक्यूएफ-अनुरूप कार्यक्रमों के तहत 3,500 से अधिक पेशेवरों को प्रमाणित किया है, 6,500 से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया है, और 10,000 से अधिक छात्रों को मेडिकल डिवाइस विनिर्माण इकाइयों का दौरा कर व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया है। अब तक आईबीएससी ने भारतभर के प्रमुख विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के साथ 200 से अधिक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।

आईबीएससी के कार्यकारी अध्यक्ष और एएमटीजेड के संस्थापक-सीईओ डॉ. जितेंद्र शर्मा ने कहा,
“एएमटीजेड में आईबीएससी का शुभारंभ भारत के बायोमेडिकल कार्यबल के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण था। हमारा मुख्य उद्देश्य केवल कौशल निर्माण नहीं बल्कि बायोमेडिकल इंजीनियरों के लिए एक वैश्विक करियर बनाना है। इस पहल से भारत न केवल अपनी स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करेगा बल्कि दुनिया को प्रतिभा भी निर्यात करेगा।”

270 एकड़ में फैले एएमटीजेड परिसर में स्थित आईबीएससी छात्रों को बायोमैटेरियल परीक्षण, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक संगतता लैब, 3डी प्रिंटिंग, लेज़र, एमआरआई मैग्नेट, गामा इर्रेडिएशन, मोल्डिंग और मशीनिंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं का सीधा अनुभव कराता है। कोविड-19 महामारी के दौरान वेंटिलेटर, ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर, आरटी-पीसीआर किट और मोबाइल लैब प्रदान करने में एएमटीजेड की भूमिका इस कार्यक्रम की वास्तविक प्रासंगिकता को साबित करती है।

आईबीएससी-एएमटीजेड के राष्ट्रीय संयोजक श्री नरेश कुमार निट्टुरी ने कहा,
“हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी में तेजी से हो रहे विकास के कारण कार्यबल का लगातार अपस्किल होना जरूरी है। आईबीएससी-एएमटीजेड शिक्षा और उद्योग के बीच की खाई को पाटने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य बायोमेडिकल इंजीनियरों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कौशल और प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराना है।”

आईबीएससी की स्थापना भारत में एक ऐसे बायोमेडिकल इंजीनियरिंग कार्यबल को तैयार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है जो भविष्य उन्मुख, वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त और भारतीय स्वास्थ्य सेवा के विकास से गहराई से जुड़ा हुआ है।

आईबीएससी के बारे में:
इंडियन बायोमेडिकल स्किल काउंसिल (IBSC) की स्थापना एएमटीजेड, एआईएमईडी और एनएबीसीबी (क्यूसीआई के अंतर्गत) द्वारा की गई है। यह भारत का पहला प्रमाणित प्राधिकरण है जो विशेष रूप से बायोमेडिकल इंजीनियरों के लिए समर्पित है। इसका मुख्य उद्देश्य संरचित जॉब रोल्स, प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन और अंतरराष्ट्रीय मान्यता के माध्यम से बायोमेडिकल कौशल क्षेत्र को मजबूत करना है। अमेरिका की एएएमआई (AAMI) और अन्य संस्थानों के सहयोग से आईबीएससी बायोमेडिकल इंजीनियरों को कौशल, विश्वसनीयता और वैश्विक अवसर प्रदान करता है।