Social media ban: फिल्मकार राम गोपाल वर्मा (RGV) ने गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की दुखद मौत के बाद नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की बढ़ती मांगों का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि इस तरह के प्रतिबंध आधुनिक डिजिटल दुनिया की वास्तविकताओं को समझने में विफल रहते हैं और बच्चों को एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी वैश्विक माहौल के लिए अधूरा और कमजोर बना सकते हैं।
यह दर्दनाक घटना 4 फरवरी को सामने आई थी, जब गाजियाबाद में रहने वाली तीन नाबालिग बहनों ने कथित तौर पर अपने अपार्टमेंट की नौवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। इस घटना ने पूरे देश में डिजिटल लत, ऑनलाइन सुरक्षा और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है।
घटना के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर कई लोगों ने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर कड़े नियम लगाने की मांग की। कुछ लोगों ने तो 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध की भी वकालत की।
“BAN THE BANNERS” — RGV की तीखी टिप्पणी
सोमवार को राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत नोट साझा किया, जिसका शीर्षक था “BAN THE BANNERS”। इस पोस्ट में उन्होंने सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के विचार की कड़ी आलोचना की। वर्मा ने लिखा कि बच्चों की सुरक्षा के नाम पर सोशल मीडिया पर बैन लगाना इस बात को नजरअंदाज करता है कि आज का संसार कितनी गहराई से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर हो चुका है।
RGV के अनुसार, सोशल मीडिया को केवल एक फिजूल distraction समझना एक बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में ये प्लेटफॉर्म्स रियल-टाइम जानकारी, स्किल डेवलपमेंट और नेटवर्किंग के सबसे अहम साधन बन चुके हैं, जो आगे चलकर शिक्षा और करियर में सफलता तय करते हैं।
वैश्विक असमानता बढ़ने की चेतावनी
राम गोपाल वर्मा ने चेतावनी दी कि यदि किसी एक देश में बच्चों की डिजिटल पहुंच सीमित कर दी जाती है, जबकि अन्य देशों में ऐसा नहीं होता, तो इससे वैश्विक असमानता और भी गहरी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन देशों में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध होगा, वहां के बच्चे उन बच्चों से पीछे रह जाएंगे, जिन्हें कम उम्र में ही डिजिटल जानकारी, ऑनलाइन समुदायों और अनौपचारिक सीखने के अवसर मिलते हैं।
वर्मा ने लिखा, “बिना बैन वाले देशों में एक किशोर सूचना प्रवाह को सहज रूप से समझना सीखता है, नए विचारों के साथ प्रयोग करता है और डिजिटल सोशल कैपिटल बनाता है।” उन्होंने आगे कहा कि ये फायदे समय के साथ बढ़ते जाते हैं और बेहतर शैक्षणिक परिणामों तथा करियर के अवसरों में बदल जाते हैं।
‘बैन से बचपन सुरक्षित नहीं होता’
फिल्मकार ने इस धारणा को भी चुनौती दी कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने से बच्चों की वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित हो जाती है। हालांकि उन्होंने यह माना कि आपत्तिजनक या हानिकारक कंटेंट को लेकर चिंताएं वाजिब हैं, लेकिन उनका कहना था कि जानकारी से वंचित रखने की कीमत कहीं ज्यादा भारी है, खासकर ऐसे दौर में जहां ज्ञान की गति सफलता का निर्णायक कारक बन चुकी है।
“ये प्रतिबंध बचपन की रक्षा नहीं करते,” वर्मा ने लिखा, “बल्कि ये एक ऐसी पीढ़ी तैयार कर सकते हैं जो डिजिटल रूप से देर से आगे बढ़े—कम जानकार, कम अनुकूलनीय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में संरचनात्मक रूप से पिछड़ी हुई।”
गाजियाबाद केस की पृष्ठभूमि
यह बहस उस समय और तेज हो गई जब पुलिस सूत्रों ने बताया कि गाजियाबाद की तीनों बहनें कथित तौर पर उस समय मानसिक रूप से परेशान थीं, जब उनके पिता ने उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए थे। पिता को आशंका थी कि उनकी बेटियां कोरियन पॉप कल्चर को लेकर जरूरत से ज्यादा जुनूनी होती जा रही हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले की जांच अभी जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।

