नई दिल्ली — लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने हाल ही में हुए भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर आरोप लगाया कि सरकार ने देश के महत्वपूर्ण हितों से समझौता किया है और डिजिटल व कृषि क्षेत्रों में भारत की संप्रभुता को कमजोर किया है।
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि 21वीं सदी में भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने में डिजिटल अर्थव्यवस्था और डेटा नियंत्रण की अहम भूमिका होगी। उनके अनुसार, सरकार ने इस समझौते के तहत डिजिटल व्यापार नियमों पर भारत का नियंत्रण कम किया है।
राहुल गांधी ने दावा किया कि समझौते में डेटा लोकलाइजेशन (Data Localisation) की अनिवार्यता को कमजोर किया गया है, अमेरिका को डेटा के मुक्त प्रवाह की अनुमति दी गई है और डिजिटल टैक्स पर सीमाएं लगाई गई हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बड़ी तकनीकी कंपनियों को दीर्घकालिक कर छूट दी गई है और स्रोत कोड (Source Code) के खुलासे की बाध्यता को हटाया गया है।
उन्होंने कहा, “जो चीज 21वीं सदी में भारत को बदलने वाली है, हमारा डेटा — उसी को आपने सौंप दिया।” राहुल गांधी ने इस समझौते को देश के डिजिटल भविष्य के लिए नुकसानदेह बताया।
कृषि क्षेत्र को लेकर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि अमेरिकी कृषि उत्पादों को अधिक बाजार पहुंच मिलने से भारतीय किसानों पर दबाव बढ़ सकता है और घरेलू उत्पादकों को नुकसान हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम किसानों के हितों के खिलाफ है।
इसके अलावा राहुल गांधी ने भारतीय टेक्सटाइल उद्योग का भी उल्लेख किया और कहा कि प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई। उन्होंने तर्क दिया कि घरेलू उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए मजबूत बनाने के बजाय उन्हें कमजोर स्थिति में छोड़ दिया गया है।
अपने भाषण में राहुल गांधी ने इस समझौते को व्यापक रणनीतिक झुकाव बताया। उनके अनुसार, डेटा गवर्नेंस, कर नीति और नियामकीय नियंत्रण जैसे क्षेत्र भारत की दीर्घकालिक आर्थिक और तकनीकी शक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने इन मुद्दों पर पर्याप्त सख्ती दिखाई।
केंद्र सरकार ने भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और बाजार पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है। हालांकि संसद में राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों पर सरकार की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
यह बहस भारत की व्यापार नीति, डिजिटल संप्रभुता और वैश्विक साझेदारियों के बीच संतुलन को लेकर चल रही व्यापक राजनीतिक चर्चा को भी दर्शाती है। आने वाले समय में इस समझौते के संभावित प्रभावों पर संसद और राजनीतिक मंचों पर बहस जारी रहने की संभावना है।

